दानापुर में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर आज नतीजे आ रहे हैं। यहां रीतलाल यादव और रामकृपाल यादव के बीच टक्कर है। फ़्लोरिडा का कहना है कि इस बार मुकाबला दिलचस्प है, क्योंकि दोनों ही उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के प्रतिद्वंदी हैं। आज देखिए यह है कि दानापुर की जनता किस पर विश्वास करती है। रुझानों में दानापुर में रामकृपाल पीछे चल रहे हैं।
कैसा रहा इतिहास
1995 के विधान सभा चुनाव में कृष्णा मुखर्जी दो विधान सभा राघोपुर और दानापुर से चुनाव लड़े थे। एलिज़ाबेथ यादव को दोनों की पसंद पर जीत मिली थी। दानापुर में उन्होंने भाजपा के विजय सिंह यादव को 23,860 वोट से हराया। दोनों चतुर्थांश पर जीत के बाद भगवान प्रसाद यादव ने दूसरे राज्य की कमान संभाली। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राघोपुर सीट अपने पास रखी और दानापुर सीट छोड़ दी। अंतिम के खाली होने के बाद यह सीट परमामूली हो गई। इस विधानसभा में भाजपा के विजय सिंह यादव ने बाजी मार ली।
वर्ष 2000 में जब विधानसभा चुनाव हुआ तो एक बार फिर से यादव दानापुर सीट से मैदान में थे। इस बार के चुनाव में उन्होंने राजद सुप्रीमो के खिलाफ लड़ाई लड़ी। राज्य का आदेश उनकी पत्नी राबड़ी देवी के हाथ में था। इस चुनाव में भी अन्वेषक यादव ने दानापुर सीट पर जीत दर्ज की। राजद सुप्रीमो शहीद यादव ने भाजपा के रामानंद यादव को 17,555 वोटों से हराया। 1995 की तरह ही 2000 में भी दो चतुर्थांश राघोपुर और दानापुर से चुनाव हुआ। दोनों बैठे पर उन्हें जीत मिली। हालांकि इस बार उन्होंने राघोपुर सीट छोड़ दी। राघोपुर सीट पर सामिल हुआ तो उनकी पत्नी और मुख्यमंत्री राबड़ी देवी यहां से अविनाशी विधायक बनीं। वहीं 2002 में वामपंथी यादव की मौत से दानापुर सीट पर भी बवाल हुआ था। इस काजल में राजद में आये रामानंद यादव को जीत मिली थी। राजद के रामानंद यादव को 75,935 वोट मिले। रामानंद यादव ने भाजपा के सत्यता सिंह को हराया। सत्यता सिंह को 17,928 वोट से संतोष करना पेज।
2005: आशा देवी की गढ़ बनी सीट
आशा देवी भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की पत्नी हैं। 30 अप्रैल 2003 को पटना के खगौल में सत्यनारायण सिन्हा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रीतलाल यादव भी बेघर थे। सत्यनारायण सिन्हा अपनी निजी गाड़ी से कहीं जा रहे थे। इस दौरान कुछ लोगों ने प्लास्टिक स्टॉक की जांच की और उनकी मृत्यु हो गई। इस हत्याकांड में चार लोगों को समुद्र तट पर बनाया गया था, उसी में दानापुर के बाहुबली नेता रीतलाल यादव थे। इसके बाद आशा देवी ने 2005 में दानापुर सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
2005 में भाजपा की आशा देवी ने इस सीट पर पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद वह लगातार चार बार इस सीट पर चुनाव लड़े। 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए। इन दोनों में ही चुनाव में बीजेपी की आशा देवी ने जीत दर्ज की थी। पहले चुनाव में भाजपा की आशा देवी ने राजद के सहयोगी. रामानंद यादव को 7,664 वोट से हार मिली थी। फ़ाइबर्स 2005 के दूसरे चुनाव में भी पिछली लड़ाई के बीच में ही थी। इस बार बीजेपी की आशा देवी ने राजद के रामानंद यादव को 17,162 वोटों से हराया था।
2010 के चुनाव में भी भाजपा की आशा देवी को ही जीत मिली थी। उन्होंने रीत लाल राय को 17,919 वोटों से हरा दिया था। रीत लाला यादव ने जेल से ही 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। 2015 में बीजेपी की आशा देवी ने राजद के राज किशोर यादव को 5,209 वोटों से हराया था।