अद्भुत थे मुंशी प्रेमचंद

कलम सम्राट प्रेमचंद की 146 वीं जयंती पर,
“अद्भुत थे मुंशी प्रेमचंद ”
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अध्यापक, संपादक, लेखक, उपन्यासकार थे प्रेमचन्द,
हिंदी जगत के सर्वमौलिक, उपन्यासकार थे प्रेमचंद ।।
वास्तव में वे एक सच्चे कलाकार थे मुंशी प्रेमचंद ,
जीवन में जो भी भोगा वही साहित्य में लिखें प्रेमचंद ।।
31 जुलाई,1880 में लमही ग्राम बनारस में जन्म,
1885 में प्रेमचंद मौलवी से उर्दू शिक्षा किये ग्रहण ।।
माता आनंदी देवी पिता थे मुंशी अजायब राय के संतान,
भारी गरीबी और संघर्षों में ही बीता प्रेमचंद का बचपन ।।
मुंशी प्रेमचंद के बचपन का नाम था धनपत राय
पहला शुरुआती लेखन उर्दू में नाम था नवाब राय ।।
1895 में बनारस हाईस्कूल में शिक्षारत थे विवाह हुआ
पत्नी शिवरानी देवी के साथ इनका जीवन निर्वाह हुआ ।।
पहली पत्नी थी जमीॅदार की बेटी उनके साथ नहीं पटी
दूसरी पत्नी शिवरानी देवी जो कि जीवन संगिनी रही ।।
उनके एक पुत्र प्रसिद्ध हुए लेखक और जीवनीकार
‘कलम का सिपाही’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार ।।
दूसरा पुत्र श्रीपत राय जो कि साहित्येतर और लेखन से जुङे
प्रेमचंद की पहली कहानी ‘संसार का सबसे अनमोल रत्न ‘थे
प्रेमचंद ने कुल ग्यारह लिखे उपन्यास प्रेमा,सेवासदन, वरदान ,
प्रेमाश्रय,निर्मला,रंगभूमि,कायाकल्प, गबन,कर्मभूमि,गोदान ।।
शरतचंद्र और अन्य ने नाम दिया प्रेमचंद उपन्यास सम्राट
रंगभूमि को 1925 में मिला पुरस्कार मंगला प्रसाद ।।
स्वभावतः प्रगतिशील होता है साहित्यकार या कलाकार
अगर यह स्वभाव न होता तो शायद वह न होता साहित्यकार ।।
उसे अपने अंदर एक कमी सी होती है और बाहर भी
हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा जिसमें
उच्च चिंतन हो ,स्वाधीनता का भाव हो,सौंदर्य का सार हो
सृजन की आत्मा हो ,जीवन में सच्चाईयों का प्रकाश हो ।।
बीमारी से जूझते,पेट में अल्सर सदगति की इच्छा
आठ अक्तूबर को आई जीवन की अंतिम मूर्च्छा ।।
1936 को मुंशी प्रेमचंदजी का देहावसान हो गया
संघर्षरत जुझारू साहित्यकार कहीं विलीन हो गया ।।
- ममता सिंह
धनबाद( झारखंड )





बहुत सुंदर प्रस्तुति