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उन्नति के राह पर बढ़ते ही जाइये

” उन्नति के मार्ग पर बढ़ते ही जाइये” ( घणाक्षरी )
पर हित सोच रखें, भाव शुभ उच्च सखे, उन्नति के मार्ग पर, बढ़ते ही जाइये।
स्वर्ग सुख मिलता है , प्रीत मीत बढ़ता है , स्वार्थ सारे त्याग कर, मित्रता निभाइये।।
घर-घर खुशी बढ़े,मेल-जोल प्रीत पढ़े, द्वेष सारे भूलकर,संग बढ़ जाइये।
मीठी वाणी बोलकर,दोनों हाँथ जोड़कर, प्रेम रस घोलकर, यक्ष सुख पाइये।।
रिंकु दुबे वैष्णवी
धनबाद, झारखंड



