लूटे के आजादी बा

” लूटे के आज़ादी बा ”
खोल द अब खूटा- खूँटी,
चरे के आजादी बा
तेहुँ चर,हम्हू चरीं,
लूटे के आजादी बा !!
मुंह मे बडूवे राम राम
करिया देह प खादी बा
जईसन करिया, जईसन मोट,
सादा कुर्ता उहो मोटका खादी बा ।।
जतना करिया ओतने मोट,
करिया कोट पअ खादी बा ।।
लोहा लक्कड़ कुलह खा तारें,
एह सरकार के आज़ादी बा !!
खर पतवार अब कहाँ उगी,
फिरी भोजन के आज़ादी बा !!
छोड़ द अब चूटा चरे ,
इहे बढ़िया आजादी बा !!
कुकर्मी कुल्ही मस्त बाडन,
मिलल भाजपा मे आज़ादी बा,
मोदी साबुन के फेन लगाके,
कौनों दल से भाग के आवस,
छुट्टा सांढ़ अस आज़ादी बा !!
ई डी, सी डी का करिहें अब,
कीचड़ मे कमल बागी बा !!
पढ़निहार लइकन के संगे,
राहुल बाबा विद्रोह मे शामिल बा,
रह रह के उ पलटी मारी,
ओकारो खूब आज़ादी बा ।।
बुझत उझत कुछ नईखे उ
नेता विपक्षी के आज़ादी बा,
आलू से उ सोना बनावस
उनके रोकले के आज़ादी बा !!
हमारा तअ रह रह बुझाता इहे ,
संसद में जओन घुस गईलें कुलहिंन
के आज़ादी बा ।।
उमेश तिवारी
वरिष्ठ पत्रकार
धनबाद, झारखंड



