कृष्ण जन्मोत्सव

कृष्ण जन्मोत्सव
रोहिणी नक्षत्र अष्टमी रात में जन्मे हैं कृष्ण,
जन्म लिए , कृष्ण पक्ष द्वापर युग में श्री कृष्ण ।।
लोग इस दिन उल्लास, से भजन कीर्तन करते हैं।
स्वेच्छा से ,पवित्र उपवास कर मिलते है श्री कृष्ण,
मथुरा के कारागार में,विष्णु अवतारी है कृष्ण ।।
अत्याचार ,अधर्म के,नाश के लिए अवतरित कृष्ण,
देवकी और वासुदेव के ,आठवां पुत्र के रूप हैं कृष्ण ।।
गरीबों और जरुरतमंदों, के ईश्वरीय के रुप हैं श्री कृष्ण,
कागासुर अगासुर पूतना ,कालिया नाग वध किये कृष्ण ।।
कनिष्ठा से पर्वत उठाकर, लोगों का कल्याण किये कृष्ण,
गैया चराये माखन चुराए ,गोपियों के संग खेलें गाये कृष्ण ।।
नंद यशोदा के पालक पुत्र, ब्रज मथुरा के उद्धारक श्री कृष्ण,
रुक्मणी सत्यभामा जाम्बवती ,राधा के प्राण कृष्ण ।।
कालिंदी,मित्रविंदा,सत्या,भद्रा ,लक्ष्मणा के पति कृष्ण,
सोलह हजार एक सौ पत्नी के स्वामी भगवन कृष्ण ।।
नरकासुर से रक्षा के लिए, आठ पत्नी भागवत मे कृष्ण,
ब्रज में अनेकों लीलाएं की,गरीब सुदामा के थे मित्र कृष्ण ।।
यशोदा को अपने मुख से,समस्त ब्रम्हांड का दर्शन कराये कृष्ण,
मैया मैया बाबा बाबा कहकर ,नंद यशोदा को हर्षाए कृष्ण ।।
राधा-कृष्ण की जोड़ी ,जग में सबको ही भाएं खूब,
गोपियों संग नंद लाला रास लीला दिखाये सब को खूब ।।
ममता सिंह
धनबाद (झारखंड )



