जन्माष्टमी

🌹☘️ जन्माष्टमी ☘️🌹
भाद्रपद की अष्टमी तिथी,
पावन वह शुभ रात,
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे ,
कृष्ण हमारे नाथ।
अंधियारी उस रात में,
जब छाया था अत्याचार,
माता देवकी ने जन्म दिया,
श्री कृष्ण पालन हार।
वसुदेव उन्हे लेकर चले,
यमुना के उस पार,
गोकुल पहुंचाकर सौंप दिए,
यशोदा के स्नेह दुलार।
देवकी के सूत, यशोदा के लाला,
कृष्ण- कन्हैया निराले,
उनकी मधुर बाल-लिलाओं से,
ब्रज के कण-कण मतवाले।
सिर पर शोभित मोर पंख,
माथे पे केसरिया तिलक लाल,
अधरों पे मधुर बाँसुरी शोभित ,
देख दृश्य नंदबाबा हुए निहाल।
गोपियन संग माखन -लीला,
राधा संग रास रचएँ,
बाँसुरी की मधुर तान सुन,
ब्रजवासी झूमत जाएँ।
तीन लोक के नाथ गिरधारी,
सुन लो मेरी विनती नाथ,
हर आंगन मे खुशियां भर दो,
सबके सिर पर रखना हाथ।
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर
गूंजे हर ओर जय जयकार,
राधे कृष्ण की कृपा बनी रहे,
महिमा तेरी अपरम्पार।
🙏जय श्री कृष्ण 🙏
डॉ नीरा प्रसाद
धनबाद झारखंड



