देश भक्ति- आत्म शक्ति

देश भक्ति आत्म शक्ति
क्यों करें प्रज्वलित दीप किसी खास दिवस पर,
वो करता रहा सदा प्रहार हमारे हृदय विवश पर।
नवीन, रहा नहीं यह नूतन हो गया निर्देश पुराना,
नीति न एक रहती है तो न जिंदा रहता है याराना।
रखा राष्ट्रहित का ध्यान,हम आ गए तेरे झांसे में,
हम समझे अपनी भूल, अब नहीं पड़ेंगे फांसे में।
मुगल आए वैमनस्य फैलाए,भाई भाई को लड़ाए,
छोटे राज्यों को मिटाए,अपना साम्राज्य फैलाए।
मंदिर का ढांचा तोड़वाया,फिर मस्जिद बनवाया,
बहुत वो तिकड़म चलाया,फिर सत्ता न बच पाया।
देखो सदा रहा इतिहास,थे आक्रांता हमसे डरते ,
स्वदेश और सनातन से प्यार,हमारे रगों में बसते।
हैं कौन हम,तू पहचानो,अगर जान सको तो जानें,
उठ चुकी है विरोध की ज्वाला,रोक सको तो मानें।
कोई बचा नहीं प्रदेश, जहां यह पहुंचा नहीं संदेश,
खुद को समझो मत लंकेश,भारत है राम का देश।
है शांति प्रदर्शन जारी,पड़ेगी यह शासन पर भारी,
हमारी कोई नहीं लाचारी, कर लो कैसी भी तैयारी।
है मौका वापस आ जाओ, नही रार और बढ़ाओ,
दो नाव पर मत पैर बढ़ाओ,होगा बुरा ठहर जाओ।
देखो तुम इतिहास खंगालो,सदा से है हमारा वर्चस्व,
फिर भी नहीं मिटा सकते,अगर लगा दो तुम सर्वस्व।
“राघव” पांडेय, ( साहित्यकार)
पूर्व वरिष्ठ शाखा प्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक
गोपालगंज, बिहार



