धनबाद के 94 वर्षीय लोकप्रिय शिक्षाविद् एवं अवकाश प्राप्त प्राचार्य सिंदरी कॉलेज सिंदरी का शिक्षा और शिक्षानीति पर सीधा साक्षात्कार

” बुजुर्गियत में नौजवानों को पीछे धकेल रही है इस लोकप्रिय शिक्षाविद् एवं अवकाश प्राप्त प्राचार्य प्रो.( डॉ.) रामावतार सिंहआत्म शक्ति के बल पर उम्र को चुनौती देते हुए एक भाग्य रेखा हैं ”
धनबाद ( झारखंड) कौन कहता है कि उम्र साथ नहीं देती प्रो डॉ रामावतार सिंह की दैनिक जीवनचर्या वर्तमान समय में बुजुर्गों को जीवन की प्रेरणा और सीख देती है। जी हां मैं एक ऐसे शख्सियत की बात कर रहा हूं जो 94 वर्ष की उम्र में भी नौजवानों को पीछे धकेलते हुए उम्र को चुनौती दे रहे है। धनबाद कोयलांचल मे स्थित पुरानी उर्वरक नगरी सिंदरी में स्थित सिंदरी कॉलेज सिंदरी के लोकप्रिय शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य प्रो डॉ रामावतार सिंह की कहानी उनके लिए है जिन्होंने उम्र से हार मान ली है। आम भावना है की भ्रष्टाचार की मूल वजह शैक्षणिक योग्यता की कमी भी महत्वपूर्ण रही है। क्योंकि एक सफल और समर्थ्यवान समाज का निर्माण शिक्षा की नीव पर ही रखी जाती है। मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार आम जनमानस की कण-कण में समा गई है। आज बिना रिश्वत दिए छोटा काम भी नहीं होता ऐसे दौर में सिंदरी कॉलेज सिंदरी के प्रसिद्ध शिक्षाविद् सेवानिवृत व्याख्याता प्रो डॉ रामावतार सिंह की अद्भुत क्षमता बेहद प्रेरणादायक है। 94 वर्ष की उम्र में प्रो डॉ रामावतार सिंह का मानना है कि मौजूदा दौर में शिक्षा की गुणवत्ता में हो रही ह्लास नहीं रूक सकती। क्योंकि भ्रष्टाचार समाज के कण-कण में समा गयी है।
इनके सेवानिवृत्ति के समय सिंदरी कॉलेज रांची विश्वविद्यालय के अधीन संचालित हुआ करता था इसके बाद उसे विभाजित कर बना विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग तथा अब विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय धनबाद।
मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार आम जनमानस के कण-कण में समा गयी है। शिक्षा की गुणवत्ता लगातार ह्लास की ओर है। यही वजह है कि बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ते हुए पूरे समाज को निगलने पर आमदा है। इस मामले में आज एक वैसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व से साक्षात्कार ले रहा हूं। जिसके नाम की चर्चा आज भी धनबाद जिले के सिंदरी में चलती है। 94 वर्षीय प्रो डॉ रामावतार सिंह, लोकप्रिय शिक्षाविद् व अवकाश प्राप्त व्याख्याता एवं प्राचार्य के रूप में 37 साल से ऊपर धनबाद जिला के सिंदरी कॉलेज सिंदरी में सेवा देने वाले प्रो डॉ सिंह का यह साक्षात्कार आज के दौर में शैक्षणिक गुणवत्ता में आ रही गिरावट की प्रतिकार में एक प्रत्यक्ष प्रमाण है। मौजूदा दौर में जब हर क्षेत्र में समझौता के द्वारा समाज की छवि गिर रही है ऐसे समय में प्रो डॉ रामावतार सिंह को भूलाना बेमानी होगा।
प्रो डॉ रामावतार सिंह का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट भी समाज में बिखराव का एक महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। प्रांतीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हर जगह यह गिरावट है। दुखद स्थिति यह है कि इसके प्रति समाज में वह समर्पण नहीं रहा जो कभी हुआ करता था। इन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा दौर में शिक्षा में वह गुणवत्ता लौट ही नहीं सकती।
अपनी सेवा काल में एक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उदाहरण देते हुए इन्होंने बताया कि उनके समय रांची विश्वविद्यालय की एंजीभूत इकाई सिंदरी कॉलेज में एकमात्र अशोक कुमार सिंह उनकी सेवा काल में 1966 और 1967 के बीच हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा में स्वर्ण पदक अर्जित किया । उनके बाद कोई छात्र अब तक रिकॉर्ड नहीं तोड़ा जबकि रांची विद्यालय से अलग होकर विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग अस्तित्व में आया और फिर अब विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय धनबाद भी अस्तित्व में आ चुका है लेकिन अब तक किसी ने स्वर्ण पदक प्राप्त नहीं किया।
इनका मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में एक कुशल प्राचार्य वास्तव में उसे ही होना चाहिए जो निर्भीक, निस्वार्थ एवं गुणवत्ता युक्त हो और उसमें प्रशासनिक निर्णय लेने की भरपूर क्षमता हो । मौजूदा दौर में जब शिक्षा का स्तर लगातार गिरावट की ओर हो वैसा प्राचार्य भला कहां मिलेगा ? वर्तमान स्थिति तो यह है कि आज के समाज में किसी भी विद्यार्थी का सबसे बड़ा हितेषी उसके माता-पिता ही पूछते हैं कि बेटा तेरे नौकरी और रोजगार में कोई ऊपरी आमदनी है या नहीं ? कहने का तात्पर्य है की यही से शुरू होती है भ्रष्टाचार का आगमन।
इन्होंने बताया कि दुखद स्थिति यह है कि मौजूदा दौर में राष्ट्रीय स्तर पर यूपीएससी की सफलता पाकर बाहर आने वाला इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस( IAS) के अधिकारी की नजरिया भी व्यावसायिक हो गई है और अपनी गुणवत्ता के बावजूद व शहर में मॉल और ऊंची इमारत तैयार करने में मशगूल है। फिर उससे आप क्या उम्मीद कर सकते हैं ?
डॉ प्रो सिंह कहते हैं कि मौजूदा दौर में सभी पैसे के पीछे दौड़ रहे हैं किसी में अपने दायित्व के प्रति वह आदर नहीं रह गई जो कभी हुआ करती थी। यही वजह है कि शिक्षा का लगातार ह्लास हो रहा है और उसी दर से बेरोजगारी और और असामाजिकता भी हावी होती जा रही है। इनका मानना है कि यह गिरावट शिक्षा से शुरू होकर नीचे स्तर तक गया है। और पूरे समाज के कण-कण में समा गया है।
इन्होंने बताया कि झारखंड में वर्तमान में जेपीएससी- जेएसएससी सीजीएल प्रकरण में हेमंत सरकार की स्थिति भी इसी का एक उदाहरण है। लेकिन समाज की दिशा बदल गई है और इसका मूल में शिक्षा का हो रहा है ह्लास है। लेकिन इसकी वजह को सुधारना अब कठिन काम है और वह बिना त्याग और समर्पण के पूरा नहीं हो सकता।
एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि उनके सेवा काल में सिंदरी कॉलेज सिंदरी मे अनुशासित और उम्दा प्रोफेसर की श्रेणी में श्रेष्ठ तीन नाम रहे, जिसमें पीके राय कॉलेज धनबाद के अवकाश प्राप्त प्रो डॉ एस के एल दास, एस एस एल एन टी महिला कॉलेज की अवकाश प्राप्त प्राचार्य डॉ किरण सिंह एवं सिंदरी कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्राचार्य डॉ कामता सिंह का नाम शामिल है। इन्होंने अंत में यही कहा कि अगर समाज को बेरोजगारी के दलदल से निकालकर उसका सफल निर्माण करना है तो शिक्षा की गुणवत्ता सुधारनी होगी।
वयो वृद्ध प्रो डॉ राम अवतार सिंह मे आज भी इतनी ऊर्जा है कि वह नौजवानों को पीछे धकेल आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं। वर्तमान समय में भी इस उम्र में जबकि तीन-तीन बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लेकर विभिन्न क्षेत्रों से सेवानिवृत्ति अवधि में आ पहुंचे हैं फिर भी मॉर्निंग वॉक में 2 किलोमीटर नियमित रूप से चलना तथा कोला कुसमा क्षेत्र में स्थित मां दुर्गा की मंदिर में लाखों रुपए दान में देकर उसे बनवाना तथा समाज के छोटे-बड़े कार्यो में हमेशा तन मन धन से समर्पित रहना इनकी पहचान है। पूरे धनबाद की ओर से सैलूट है ऐसे शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्य को।
उमेश तिवारी ( वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार की रिपोर्ट )
धनबाद , झारखंड



