*नव प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन (रजि.) ने कवि सुनील कुमार खुराना को ‘हिंदी रत्न सम्मान 2026’ से किया अलंकृत*

नकुड़ (सहारनपुर), 1 सितंबर 2026। हिंदी दिवस के पावन अवसर पर नव प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन उत्तर प्रदेश द्वारा हिंदी भाषा, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान के लिए वरिष्ठ कवि, शिक्षक एवं समाजसेवी श्री सुनील कुमार खुराना, नकुड़, जिला सहारनपुर को ‘हिंदी रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया है। संस्था द्वारा उनके दीर्घकालिक साहित्यिक अवदान की भूरि-भूरि सराहना की गई है। श्री खुराना पिछले कई दशकों से हिंदी की सेवा में समर्पित हैं। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति अनुराग, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कारों की नींव रखी। एक कवि के रूप में उनकी रचनाएं सरल, सहज और हृदयस्पर्शी भाषा में गहन जीवन-दर्शन प्रस्तुत करती हैं। हाल ही में ‘नीति के पथ पर’ विषय पर उनकी पुरस्कृत कविता तथा ’युवा पीढ़ी को संस्कारवान कैसे बनाएं’ विषय पर उनके विचार-मंथन को साहित्यिक जगत में विशेष सराहना मिली है। उनका मानना है कि समर्पण, साधना, परिश्रम, अनुशासन व लगन से किया गया कार्य अवश्य सफल होता है। इसी सिद्धांत को उन्होंने अपने जीवन और लेखन दोनों में आत्मसात किया है। वे ज्ञानदीप समाज कल्याण युवा संस्था (रजि.), सहारनपुर सहित अनेक सामाजिक-साहित्यिक संगठनों से जुड़कर काव्य-संध्या, विचार गोष्ठियों और युवा प्रेरणा कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करते रहते हैं।
सम्मान की घोषणा पर फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. कृष्णा जोशी ने कहा, “श्री सुनील कुमार खुराना का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज है। हिंदी के प्रति उनकी निष्ठा अनुकरणीय है।” उपाध्यक्ष ममता त्रिपाठी, सचिव पूजा सिंह, संयुक्त सचिव साधना मिश्रा ‘विधि’, कोषाध्यक्ष शांति सिंह, सदस्य वंदना डोगरी, सीमा त्रिपाठी एवं प्रतिभा जैन ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। सम्मान प्राप्ति पर सुनील कुमार खुराना ने विनम्रता व्यक्त करते हुए कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, मां हिंदी का सम्मान है। यह मुझे और अधिक दायित्वबोध के साथ हिंदी सेवा के लिए प्रेरित करेगा।” उन्होंने फाउंडेशन के प्रति आभार जताया और आजीवन हिंदी प्रचार-प्रसार का संकल्प दोहराया। फाउंडेशन का विश्वास है कि ऐसे समर्पित साहित्यकारों के सम्मान से हिंदी आंदोलन को नई ऊर्जा मिलेगी और युवा पीढ़ी मातृभाषा से और गहराई से जुड़ेगी।



