फर्जी म्यूटेशन का बड़ा खेल थानेदार से रंगदार तक ने खरीदी पुश्तैनी जमीन फिर करोड़ों की बिक्री!

औरंगाबाद(रमाकांत सिंह )। कुटुम्बा अंचल कार्यालय के दाखिल खारिज वाद-724/2014-15 में तत्कालीन अंचल अधिकारी द्वारा रिसियप के मात्र दो भाईयों की जमीन को कथित तीसरे भाई को हिस्सेदार स्वीकार करते हुए फर्जीबाड़े से किये गये म्यूटेशन के बाद बड़ा खेल हुआ है। जिस कथित तीसरे भाई के नाम पर फर्जी म्यूटेशन हुआ, उसके वंशजों ने जब जमीन की बिक्री शुरू की तो थानेदार से लेकर रंगदार ने टुकड़े-टुकड़े में जमीनें खरीद ली। इसे लेकर पीड़ित परिवार पिछले 11-12 साल से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। इस बीच पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और जन शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा शुरु किये गये ‘सहयोग पोर्टल’ पर भी अपनी पीड़ा बयान करते हुए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में पीड़ित परिवार के सदस्य युगेश कुमार ने बतौर परिवादी कहा है कि एक तो उनके पिता शालिक महतो के नाम से दायर फर्जी आवेदन से दाखिल खारिज वाद-725/2014-15 का कुटुम्बा के तत्कालीन अंचल अधिकारी ने उनके दिवंगत परदादा(मात्र दो भाई) जगदेव मेहता और बौद्ध मेहता के कथित तीसरे भाई महादेव मेहता करार देते हुए फर्जी तरीके से निष्पादन कर दिया। इसकी जानकारी मिलने के बाद वें एक साल से अपने पिता के नाम पर दाखिल मूल आवेदन और दाखिल खारिज वाद के पूरे रिकॉर्ड की नकल मांग रहे है, तो कुटुम्बा के वर्तमान अंचल अधिकारी चंद्रप्रकाश द्वारा खोजबीन जारी कह कर लगातार टरकाया जा रहा है। इसे लेकर अपीलीय प्राधिकार में शिकायत के बाद भी यही स्थिति बनी हुई है। वें दावें के साथ कह सकते है कि दाखिल खारिज वाद-725/2014-15 से संबंधित उनके द्वारा मांगे गये नकल के दस्तावेज को कुटुम्बा के अंचल अधिकारी, ऑफिस क्लर्क और दफ्तरी ने भू-माफिया के प्रभाव में रिकॉर्ड को गायब या विलोपित कर दिया है, ताकि उन्हे वाद के मूल आधार अपने पिता शालिक महतो के फर्जी हस्ताक्षर से दिये आवेदन आदि का नकल प्राप्त हो और उन्हे न्याय व अपने अधिकार से वंचित किया जा सके। इस बीच उन्हे जानकारी मिली कि उनके परिवार की पुश्तैनी जमीन का 1/3 हिस्सा जिस कथित महादेव मेहता के पक्ष में दाखिल खारिज से अंतरित किया गया, उसके परिवार के लोगों ने इस जमीन को कईयों को बेंचा है। इस तरह की बिक्री का जब उन्होने भूमि निबंधक, औरंगाबाद के कार्यालय से नकल निकाला तो ज्ञात हुआ कि इस जमीन को थानेदार से लेकर रंगदार तक ने खरीदा है। उन्हे नकल से मिली दस्तावेजी जानकारी के अनुसार, रिसियप थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने अपनी पत्नी नेहा कुमारी, रिसियप के ललित प्रसाद ने अपनी पत्नी प्रेमलता वर्मा, जहानाबाद के बभना निवासी साढ़ू राजीव रंजन, रिसियप के ही रंजीत कुमार, बारूण के चंदौली टोले सोहर बिगहा निवासी विजय मेहता के पुत्र सुमन कुमार, संतोष कुमार, लालजीत कुमार और विकास कुमार राज ने टुकड़ों में इस जमीन को खरीदा है। पीड़ित का आरोप है कि जमीन की इस तरह की बिक्री में करोड़ो का खेल हुआ है और इस खेल को न केवल संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है, बल्कि इसमें उनकी संलिप्तता भी है। ऐसे में देखना यह है कि पीड़ित को सहयोग पोर्टल पर शिकायत के बाद न्याय मिलता है या वह न्याय की आस में दर-दर भटकता ही रहता है?



