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महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा
आधुनिक युग की मीरा कहलाए ।
महादेवी वर्मा की जब नाम आए ।।

छायावादी युग की वो एक स्तंभ ।
कविता रेखाचित्र संस्मरण निबंध ।।

जन्म स्थान फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश ।
मृत्यु स्थान प्रयागराज उत्तर प्रदेश। ।

रहस्यमयी और वेदना भरी कविताएं ।
निहार हिन्दी में पहली काव्य आए।।

आत्मा और परमात्मा के तो संबंध ।
उनकी रश्मि कविता से है अनुबंध।।

प्रकृति अध्यात्म में है आर्कषण ।
कविता निहार है जी मनभावन ।।

वेदना पीङा औेर जुङी दृश्य प्रकृति।
नीरजा में है यही तो अभिव्यिक्त ।।

जीवात्मा का परमात्मा में लीन ।
कविता में भाव प्रमुख सांध्य गीत ।।

बनायीं प्रतीक महादेवी दीपक को ।
रहस्य बना गई कविता दीपशिखा को।।

पायी यामा प्रसिद्ध काव्य ग्रंथ से।
ज्ञानपीठ पुरस्कार को महादेवी ने।।

जीवन में साधारण औेर शोषित पात्र।
महादेवी खीचें चित्र अतीत के चलचित्र ।।

समाज में निम्न वर्ग के लोगों के संघर्ष ।
स्मृति की रेखायें रेखाचित्र में है सहर्ष।।

उनकी समकालीन प्रसिद्ध साहित्यकार ।
पथ के साथी में पंत, निराला ,रविन्द्र नाथ ।।

मेरा परिवार कृति में गिल्लू गौरा नीलकंठ ।
पालतू पशु पक्षियों से है उनका गहरा संबंध ।।

श्रृंखला की कङियां नारी स्थिति दयनीय ।
क्षणदा निबंधों का संग्रह यही है ललित ।।

प्रसिद्ध रचनाएं आत्मिका ,परिक्रमा ,यामा।
गीत पर्व,दीप गीत,स्मारिका,और नीलांबरा।।

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड )

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