मां बाला त्रिपूर सुंदरी जगदम्बा माता

“मां बाला त्रिपूर सुंदरी जगदम्बा माता “
जय माता दी
मां बाला त्रिपुर सुन्दरी जगदंबा माता
मंदिर गुम्बज स्वर्ण कलश आकर्षित करता।।
मां वैष्णों देवी जम्मू-कश्मीर के संस्थापक ।
श्रीधर ओझा जी इसके कर्ता संस्थापक ।।
बिहार जिला लखीसराय के बङहिया में।
मां त्रिपुर सुंदरी जगदंबा अवस्थित मंदिर में।।
पालवंश काल में स्थापित बङहिया ग्राम ।
मूल निवासी बङहिया के श्रीधर ओझा नाम।।
ओझा जी तपस्या की जाकर हिमालय गुफा में।
त्रिपुर सुंदरी बाला की स्थापना श्रीधर ओझा ने।।
पूरब में गंगा पश्चिम में हरुहर नदी बहती थी।
बङहिया में सैंकङों विषधर सर्प प्रवास करते थे।।
ग्रामीणों की मौंते हो जाती थीं सर्प दंश से।
निजात दिलाने खातिर देवी साधना की ओझा ने।।
भक्त की पुकार सुन मां त्रिपुर सुंदरी हुई प्रकट।
देवी ने उपाय सुझाए अकाल सर्प दंश की कष्ट ।।
श्रीधर ओझा मां को स्थापित किए बङहिया में।
मंत्रोपचार करने लगे सभी पीड़ित का सर्प दंश से।।
श्रीधर गंगा में मिट्टी खप्पर में जलती ज्वाला देखा।
तपोबल से माता को पहचान कर उनसे बात किया।।
मंदिर स्थित कुंआं का जल मां कृपा से हुआ अमृत।
जल पिला मंत्रोच्चार से हुआ सर्पदंश रोगी जीवित ।।
मंदिर का गर्भ-गृह जमीन से बारह फीट ऊंचा।
मां के नौ रूपों की प्रतिमा भक्तों की है आस्था।।
दरबार में सच्चे मन से भक्त करते है आराधना ।
कभी भी बेकार नहीं होती है उनकी ये साधना।।
मां जगदंबा यहां पर पिंड स्वरूप हैं विराजती ।
नाम महाकाली,महालक्ष्मी,और महासरस्वती।।
करोङों रुपये की लागत से मंदिर के समीप बनी।
श्रीधर सेवाश्रम की खूबसूरती की छटा देखते बनी।।
पुष्प श्रृंगार सुबह शाम आरती माता का दैनिक ।
तीनों देवी की छटा होती है स्वरूप अलौकिक ।।
वैष्णोदेवी माता की जो श्रद्धालु ने नहीं किए दर्शन ।
वे बङहिया में मां बाला त्रिपुर सुंदरी के करते दर्शन ।।
मंदिर के मुख्य पुजारी दिग्विजय झा ने बताया
मां बाला त्रिपुर सुंदरी केंद्र है भाव आस्था का ।।
उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश रायपुर से श्रृद्धालु आते मिलने
प्रसिद्धि उनकी इतनी फैली विदेश से भी मिलने आते।।
ममता सिंह
धनबाद( झारखण्ड )



