न्यूज
मां कात्यायिनी शक्ति और संजीवनी का संगम

“माँ कात्यायनी शक्ति और संजीवनी का संगम ”
सिंह-सवारी, खड्गधारिणी, कमल-सी मुस्कान,
माँ कात्यायनी लेकर आईं निर्भयता का वरदान।
महर्षि कात्यायन के तप से, जग में ज्योति जगाई,
महिषासुर के मद को हरने, रणचंडी बन आईं।
नवरात्रि के छठे दिन माँ, शक्ति का दीप जलातीं,
अन्यायों के अंधकार में, न्याय-सूर्य बन जातीं।
मोइया-माचिका का नाम, परंपरा में आया,
वन-वन की औषधि में देखो, प्रकृति का अनमोल साया।
मधु-सा मीठा भाव जगाएँ, कटुता दूर भगाएँ,
तन-मन के आरोग्य हेतु, प्रकृति से नाता जोड़ें।
नारी केवल कोमलता नहीं, वह दुर्गा की ज्वाला,
माँ कात्यायनी का आशीष—हर मन हो उजियाला।
डॉ सुदेश चुघ
धनबाद, झारखंड



