कुकुभ छंद : ” मुखर अंजना बोल सुधा से “

*कुकुभ छंद*
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शिल्प – 16/ 14 मात्रा पर यति
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” मुखर अंजना बोल सुधा से ”
भारत का साहित्य सुहावन,
काव्य कला की पूजा है।
सूर कवि तुलसी मीरा का,
नाम जगत में गूँजा है।।
नव रस सुंदर बनी आत्मा,
अंलकार की काया है।
शब्द शक्ति सौपान “अंजना”,
अर्थ निरंतर माया है।।
भेद काव्य के द्वय निराले,
व्याकरण ने माने है।
गेय मुक्तक पाठ्य मुक्तक,
विद्वानों से जाने है।।
दोनो ही भेदो मे सुंदर,
अंलकार की शोभा है।
सुखद व्यंजना है रसना की,
पढ़कर ह्रदय लोभा है।।
काव्य कला कवियों की महिमा,
भाषा हिंदी प्यारी है।
छंद सुहाने मुक्तक प्यारे,
लिए दिव्यता भारी है।।
कविता का इतिहास हमेशा,
भारत माँ की धाती है।
मुखर अंजना बोल सुधा से,
जन- जन के मन भाती है।।
अंजना सिन्हा “सखी ”
राष्ट्रीय साहित्यकारा
रायगढ़, छत्तीसगढ़



