शिक्षक दिवस पर – शिक्षकों को नमन

*शिक्षक दिवस पर – शिक्षक को नमन*
कवि नहीं, मैं काव्य-मरघट का भूत हूँ,
शिक्षकों के स्नेह से ही अभिभूत हूँ।
मैं शब्दों का नहीं, शिक्षा का दूत हूँ,
शिक्षकों के कृपा से प्रेरणा पूत हूँ।
शिक्षक दिवस पर शिक्षकों में अवधूत हूँ,
अंधकार के द्वार पर खड़ा,यमदूत हूँ।
कई शिक्षकों के ज्ञान से फलीभूत हूँ,
उनकी पाठशाला से संस्कारित- सूत हूँ।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन से अंगीभूत हूँ,
उनके शिक्षक-आदर्श से ही द्रविभूत हूँ।
मैं अक्षर नहीं, शब्दाक्षर अर्थ युक्त हूँ,
शिक्षक श्रद्धा से भाग्य-लेख प्रयुक्त हूँ।
शिक्षक की डाँट और प्रशंसा मे छिपा अभियुक्त हूँ,
शिक्षक के ज्ञान से ही प्रतिभा का रूप संयुक्त हूँ।
कक्षा की चार दीवारों में ही ब्रह्मांड दिखा,
शिक्षक ने पत्थर को घीसा, तराश सिखा।
नमन हर शिक्षक को, जिसने थामा हाथ मेरा,
अंधेरे में दीप बनकर,पथ प्रदर्शक बने मेरा ।
मैं जो भी हूँ, शिक्षकों का ही प्रतिरूप हूँ,
उनके ऋण का आज चिर-ऋणी स्वरूप हूँ।
अशिक्षितों का मैं काल रात्रि यमराज हूँ,
शिक्षक कृपा से शिक्षा को देता ताज हूँ !
आचार्य संजय सिंह ‘ चंदन ‘
धनबाद, झारखंड



