” भारत रत्न ” मोक्षगुंडम डॉ. विश्वेश्वरैया

15 सितंबर ” इंजीनियर्स डे ” ( अभियंता दिवस ) पर विशेष
” भारत रत्न ” मोक्षगुंडम डॉ विश्वेश्वरैया
प्रथम अभियंता भारतीय, श्री विश्वेश्वरैया नाम,
उनकी झाँकी देखिये, करें कोटि कोटि प्रणाम ।
वाणी उनकी प्रेरणा, भरती उर में जोश,
राष्ट्र-धर्म के पथ पर , देते हैं संतोष ।
मैसूर के रत्न थे, मोक्षगुंडम बड़े अनमोल,
पारखी अंग्रेज भी, समझ गये थे मोल ।
ऊँची शिक्षा लक्ष्य था, यही बना उसूल,
चिकबल्लापुर जन्म भू, पढे हाई स्कूल ।
बेंगलुरू मे ज्ञान लिया, छात्र रहे अनमोल,
पुणे से अभियांत्रिकी की,जग जाना है मोल ।
राष्ट्र प्रेरित मूल्य थे, विज्ञान स्तंभ आधार,
दर्शन- चिंतन से मिला, भारत को विस्तार ।
प्रतिभा का लोहा माने सब, मिला खूब सम्मान,
मैसूर- हैदराबाद में, जॉर्ज ने दिया ” सर ” का मान ।
जन जन ने तब कह दिया मैसूर पिता महान,
हैदराबाद को सींच कर, दिये नूतन सरस विहान ।
तप तक कर ही वे बने, अभियंता- ध्रुव- तार,
९२ वर्ष आयु रही,मेहनत, संयम ही आधार ।
भारत के नव-स्वप्न को, किये आप साकार,
तपोनिष्ठ अभियंता को, भारत का अति प्यार ।
गर्व हमें है आप पर, युग युग मे अभिमान,
मोक्षगुंडम के चरणों में अर्पित दिव्य सम्मान ।
” भारत रत्न “डॉ. विश्वेश्वरैया का अमर रहेगा नाम,
राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा, समर्पण से बनें महान ।
भारत के अभियंताओं का गर्व से हो गुणगान,
डॉ. विश्वेश्वरैया को भारत का कोटि कोटि प्रणाम ।
आचार्य संजय सिंह ‘ चंदन ‘
धनबाद, झारखंड



