हिन्दी साहित्य भारती, धनबाद जिला का भव्य काव्य गोष्ठी सम्पन्न

धनबाद ( झारखंड)
गत दिनों हिंदी साहित्य भारती, धनबाद जिला इकाई, झारखंड का कवि सम्मेलन सह हिंदी पखवाड़ा अवनी डेंटल क्लिनिक एंड इम्प्लांट सेंटर हीरापुर धनबाद में मनाया गया। कवि सम्मेलन की शुरुआत आदरणीया डॉ संगीता नाथ के सरस्वती वंदना से हुई।
कवि सम्मेलन में निरजा पप्पी ने भक्ति गीत नाम सुमिर ले बन्दे हरी ही हरी से भक्ति भाव भर दिया वहीं स्नेह प्रभा पाण्डेय ने हिंदी की हरियाली से ही बगिया आज महकती है गाया। डॉ संगीता नाथ ने दर्द मनुहार श्रृंगार के, भाव तुमको ही अर्पित किया गजल से समां बांध दिया । डॉ नीरा प्रसाद ने साहित्य समाज का दर्पण। पाण्डेय सरिता “राजेश्वरी” ने जिसने जितना साथ निभाया, धन्यवाद कर बढ़िए। सिमरन श्रीवास्तव ने भोजपुरी दोहा बाहर कोलाहल मचल, मचल कलह कपारे से मन विनोद कर दिया। सुमन मिश्रा ने पारलौकिक सदा मुक्ति का द्वार है, एक निवेदन सतत प्रेम उद्धार है। मंजु शरण मंजुल ने मन का भाव सहेजे हिंदी, अक्षर शब्द उकेरे हिंदी सुनाया प्रमिला श्री तिवारी ने आओ प्यारी हिन्दी भाषा का सम्मान करें। ममता पाण्डेय ने थोड़ा सातो मान रखे, सर्व हित ध्यान रखें। शालिनी झा ने जिसमें विराट अच्युत उद्भव तिरते हैं भाव। प्रीति कर्ण ने हमें जिद थी जो खिलने की न हमने क्यारियां देखी। डॉ स्नेह लता ने विद्या है जन जन का अधिकार। मनोज बरनवाल”अंजान” ने सुखमय जीवन पाता मानव, अंतर्मन के बल से केवल।
अध्यक्ष विश्वजीत कुमार “विश्वकिरण” ने झारखंड का महत्वपूर्ण पर्व करमा पर कविता चल सखी नदी किनारे
मोनी में बालू भरकर हम सब लाएंगे। गेहूं, धान, चना, जौ, मकई के बीज उसमें हम लगाएंगे सुनाकर झारखंडी रंग में समां बांध दिया।
मंच का संचालन सिमरन श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष विश्वजीत कुमार “विश्वकिरण” ने किया।



