औरंगाबाद जिले में होरहा महोत्सव पर साहित्यिक जुटान

लोक संस्कृति को बचाने की कवायद
औरंगाबाद(सुरेश विद्यार्थी), जिला मुख्यालय औरंगाबाद की महत्वपूर्ण साहित्यिक संस्था जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में होरहा महोत्सव का आयोजन किया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सनातनी परंपरा का महान पर्व होली के अवसर पर मनाए जाने वाले होरहा महोत्सव की अध्यक्षता जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने किया।जबकि, संचालन की जिम्मेवारी उपाध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सुरेश विद्यार्थी ने निभाई। सर्वप्रथम चने के झंगरी को आग में झुलसाकर उसके हरे दाने को अलग कर उसे साहित्यकारों के बीच धनिया चटनी और देसी गुड़ के बीच परोसा गया साहित्यकारों ने होरहा के रसास्वादन के पश्चात होली पर्व से जुड़े विभिन्न आख्यानकों की चर्चा की। तत्पश्चात लोक संस्कृति का हिस्सा होरहा को बसंतोत्सव का प्रसिद्ध व्यंजन बताया। प्रसिद्ध समाजसेवी,कई शिक्षण संस्थानों के संस्थापक अंबिका पांडेय ,इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ कुमार वीरेंद्र,समकालीन जवाबदेही पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, गणितज्ञ डॉ शिवपूजन सिंह, पर्यावरणविद् डॉ रामाधार सिंह, जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री धनंजय जयपुरी, समाजसेवी अशोक कुमार सिंह सिंहेश सिंह,नारायण सिंह अर्जुन सिंह, कविवर अनुज बेचैन,प्रधानाध्यापक चंदन कुमार पाठक,शब्दाक्षर के जिलाध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद केसरी,अलख देव सिंह सहित अन्य विद्वत जनों ने होरहा के बारे में बताया कि होरहा हमारी लोक संस्कृति का हिस्सा है।होली और होरहा का अन्योन्याश्रय संबंध है।इसके बहाने जो साहित्यिक जुटान हुई है वह एक संकल्पित प्रयास है अपनी लोक संस्कृति की रक्षा करना। हमारी लोक संस्कृति जो मोबाइल में खोकर हासिए पर पहुंच चुकी है। उसे पुनः धरातल पर लाने का प्रयास करना वर्तमान परिवेश में युवा पीढ़ी या समाज के जो भी महत्वपूर्ण है वह ज्यादातर समय मोबाइल में बिताते हैं ऐसी स्थिति में इस तरह के आयोजन से हमें अपनी संस्कृति सभ्यता लोकाचार को संजीवनी कैसे प्रदान करना है इसके बारे में चर्चा की गई



