लोकप्रिय हैं इंदर सिंह नामधारी

*”लोकप्रिय हैं इंदर सिंह नामधारी”*
पिता जोध सिंह, माता द्रौपदी के राजदुलारे,
होनहार पुत्र हैं सरदार इंदर सिंह नामधारी।
जन्मभूमि नौशेरा, पंजाब था जो अब पाकिस्तान में,
सैंतालीस के विभाजन में आए भारत – हिंदुस्तान में।
बिहार की माटी को कर्मभूमि बनाये नामधारी,
राज्य बँटा तो झारखंड की हुई ये भूमि सारी ।
डाल्टेनगंज आवास है, जहाँ बसे हैं नामधारी,
बी.आई.टी. सिंदरी से इंजीनियरिंग डिग्रीधारी ।
सन् छियासठ में जनसंघ में आए, संघ हुआ आभारी,
समर्पण आपका कौन भूलेगा, रहे कई बार प्रभारी।
बी.आई.टी. में इलेक्ट्रॉनिक्स के बने अस्थाई प्राध्यापक ,
प्रतिभाशाली नामधारी थे अद्भुत ज्ञान दीप के साधक ।
जन-सेवा की प्रबल भावना, ऐसी ही थी तैयारी,
आपातकाल के काले साए में हुई थी गिरफ्तारी ।
सन् अस्सी से डाल्टेनगंज के विधायक नामधारी,
भाजपा ने सौंपी नेता विधायक दल की जिम्मेदारी ।
बिहार राज्य पथ परिवहन के चेयरमैन बने निगम में,
विधानसभा निवेदन समिति के अध्यक्ष रहे सदन में।
झारखंड में बीआडा के बने अध्यक्ष इंदर नामधारी,
सन् दो हजार मे प्रथम विधानसभा अध्यक्ष नामधारी ।
तीन बार झारखंड के एकमात्र विधानसभा अध्यक्ष ,
दो हजार आठ में ‘उत्कृष्ट विधायक सम्मान’ से आप दक्ष ।
छह बार विधायक रह संघर्ष किया बारी-बारी,
‘वनांचल अलग करो’ की चिंगारी फूँके नामधारी।
जन-समर्थन देख भाजपा ने बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाया,
राजस्व, भूमि सुधार, परिवहन मंत्री का दायित्व निभाया।
लोकसभा सांसद बन दिल्ली पहुँचे नामधारी,
प्रोटेम स्पीकर लोकसभा की शायरी प्यारी-प्यारी ।
बंद जपला-डालमिया फैक्ट्री के आंदोलनकारी,
वनांचल रथ को गाँव-गाँव पहुँचाये नामधारी।
समाज-सेवा में अव्वल रहे इंदर सिंह नामधारी,
कॉलेज-स्कूल खोले, सदा रहे जन-हितकारी।
कवि-हृदय, चिंतक, लेखक, प्रखर विचारक हैं नामधारी,
संत-वाणी,गुरु-वाणी,मधुर वाणी के धनी हैं नामधारी ।
जन-जन की आवाज, करुणामय हैं नामधारी,
गरीब, किसान,छात्र,व्यापारी सबके हैं नामधारी।
राजनीति के लुच्चे या क्या जानें खादी आडंबरधारी ?
सौम्य,सरल,निःस्वार्थ,मृदुभाषी, जन-धनी हैं इंदर सिंह नामधारी।
भाजपा से संपूर्ण क्रांति तक अग्रदूत रहे नामधारी,
बिहार- झारखंड के भूत,भविष्य, वर्तमान हैं नामधारी ।
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*रचनाकार – आचार्य संजय सिंह ‘चंदन’*
*धनबाद, झारखंड*



