तुम तो गुरुवर कृपा सिंधु हो

गीत : तुम तो गुरुवर कृपा सिंधु हो
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भगवन वंदन है अभिनन्दन ज्ञान ज्योति प्रस्फुटित करें।
मन का कलुष मिटाकर गुरुवर सद्कर्मों को फलित करें।।
मन में भरा अँधेरा कितना प्रज्ञा ज्योति जला देना।
आप ज्ञान के सूरज हो बस सारा तमस मिटा देना
भटक रही हूँ राह अँधेरी ,पथ दीपक प्रज्ज्वलित करें।
मन का कलुष गुरुवर सद्कर्मों से फलित करें।।
तुम तो गुरुवर कृपा सिंधु हो रत्नों का भंडार लिए।
सच्चा ज्ञान मार्ग बतलाकर कितने पापी तार दिए।।
मेरे दूषित मन का सारा दोष प्रभो आहरित करें।
मन का कलुष मिटाकर गुरुवर सद्कर्मों से फलित करें।।
आज अकिंचन मै दुनिया में द्वार तुम्हारे आई हूँ।
पूर्ण करो मेरी हर आशा ये अभिलाषा लाई हूँ।।
मुझको भी अपने भक्तों में आश्रय दें सम्मिलित करें ।
मन का कलुष मिटाकर गुरुवर सद्कर्मों से फलित करें।।
मै हूँ काठ और तुम चंदन ,तुम पानी मैं कीच रही।
तुम हो पावन गंगा का जल ,मैं खल कामी नीच रही ।।
ऐसी भक्ति प्रदान करें प्रभु मुझको अवगुण रहित करें।
मन का कलुष मिटाकर गुरुवर सद्कर्मों से फलित करें।।
डॉ. अंजना सिन्हा “सखी ”
रायगढ़, छत्तीसगढ़



