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गोदान काव्य रूपांतरण का लोकार्पण समारोह धूमधाम से संपन्न 

औरंगाबाद 8/6/25, सदर प्रखंड स्थित दशरथ प्रसाद रामानंदन पांडेय बी एड कालेज चित्रगोपी के सभागार में झारखंड के प्रसिद्ध कवि राकेश कुमार मिश्र रचित गोदान काव्य रुपांतरण का लोकार्पण किया गया।बी एड कॉलेज के सचिव शंभूनाथ पांडेय के अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन टाइम्स आफ इंडिया के ब्यूरो प्रमुख प्रेर्मेंद्र मिश्रा द्वारा किया गया।सर्वप्रथम मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित शाहाबाद रेंज के डीआईजी डॉ सत्यप्रकाश, पंचदेव धाम चपरा के संस्थापक अशोक कुमार सिंह, जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, वरीय साहित्यकार श्रीधर प्रसाद द्विवेदी,पलामू के समालोचक प्रो सुरेंद्र मिश्र समकालीन जवाबदेही के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र,शैलेंद्र दुबे, शब्दाक्षर के राष्ट्रीय प्रचार मंत्री धनंजय जयपुरी, डॉ शिवपूजन सिंह,बी एड कालेज के प्राचार्या करूणा कुमारी,प्रो रामाधार सिंह, वरीय अधिवक्ता सिद्धेश्वर विद्यार्थी सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत एवं पुस्तक का लोकार्पण किया।धनंजय जयपुरी द्वारा सभी अतिथियों को काव्यात्मक व्याख्या करते हुए स्वागत किया।कवि एवं गोदान काव्य रुपांतरण के लेखक राकेश कुमार ने अपने संबोधन के क्रम में कहा कि मुझे इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा औरंगाबाद से ही मिली। औरंगाबाद के महान साहित्यकार मिथिलेश मधुकर से मुझे काव्य लिखने की प्रेरणा मिली।मुख्य अतिथि शाहाबाद रेंज के डीआईजी डॉ सत्यप्रकाश ने कहा कि गोदान नारी सशक्तिकरण का बेजोड़ उदाहरण हैं। राज्य की सीमा बदल सकती है परन्तु समाज कभी नहीं बदलता। आज के युवा पीढ़ी के व्हाट्सअप यूट्यूब को ज्यादा महत्व देते हैं जो चिंता कि विषय है।अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं देश के विभिन्न हिस्सों में घूम कर देखा हूं तो पता चला कि विश्वविद्यालय में किसी भी विषय को काव्यात्मक रूप में बनाया जाए तो बच्चों को जल्द याद हो जाती है और वह उनके जेहन में बैठ जाती है।कवि राकेश कुमार ने गोदान को काव्यात्मक बनाकर सभी के लिए सुलभ बनाया है। पंचदेव धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद के गोदान में पूरे भारत के ग्रामीण परिवेश का दर्शन कराया गया है।श्रीधर चतुर्वेदी ने कहा कि पलामू औरंगाबाद का सांस्कृतिक संबंध युगों युगों से रहा है।प्रो सुरेंद्र मिश्र ने कहा कि कवि द्वारा इसे संक्षिप्त काव्य रुप में प्रस्तुत कालजई कार्य किया।डॉ रामाधार सिंह,प्रो शिवपूजन सिंह ने कहा कि प्रेमचंद के पात्रों ने जीवन को शिखर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यासो में उन पात्रों की प्रधानता होती जो सदियों से उपेक्षित रहा है। गोदान उपन्यास के पूरी कहानी का संक्षिप्त परिचय किया।गोदान की कहानी दो वर्गों में बंटी हुई है।एक अभिजात्य वर्ग और दूसरा उपेक्षित वर्ग।इसका होरी पात्र सही मायने में इस उपन्यास का हीरो हैं।जिस रचना में संवेदना और करूणा की प्रधानता होती है।वही रचना श्रेष्ठ मानी जाती है। केशरी नंदन ने कहा कि राकेश कुमार ने गोदान का काव्य रुपांतरण कर अंधेरे से उजाला में लाने का प्रयास किया है। अध्यक्षीय उद्बोधन में शंभूनाथ पांडेय ने कहा कि गोदान का यह काव्य रुपांतरण आने वाले भविष्य में की भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा ।यह पुस्तक समाज के उस वर्ग को जगाने का कार्य करती है जो सदियों से उपेक्षित रही है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए समकालीन जवाबदेही पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि राकेश कुमार ने काव्य रुपांतरण कर दुरुह कार्य किया है।काम काज, राम काज और आम काज में सबसे महत्वपूर्ण आम काज है।मौके पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष सुरेश विद्यार्थी चन्दन कुमार,लालदेव प्रसाद, लवकुश प्रसाद सिंह, रामभजन सिंह,अनुज बेचैन, विनय मामूली बुद्धि, नागेन्द्र केशरी, रामजी सिंह,प्रो राजेंद्र सिंह,नीरज पाठक, प्रियंका पांडेय,पुरुषोत्तम पाठक,श्रवण कुमार सिंह,सिहेंश सिंह, जनार्दन मिश्र जलज, आदित्य श्रीवास्तव, राम सुरेश सिंह, अलखदेव सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

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