हमें आज़ाद करा गए वो

“हमें करा आज़ाद गए वो ”
आज़ादी के लिए लगा दी,बाज़ी अपनी जान की।
उन सब वीरों की जय बोलें,
जय-जय हर बलिदान की।।
जिन माओं ने सौंप दिए सुत,
मातृभूमि की गोद में।
और रही सिंदूर सौंप कर,कई नवोढ़ा मोद में।।
नित्य वंदना हो ऐसी भी,नारी शक्ति महान की..
उन सब वीरों की जय बोलें..
घर परिवार त्याग कर निकले,
चिंता छोड़ी प्राण की।
चिंता थी बस मातृभूति की,
विदेशियों से त्राण की।।
थी परवाह भारती माँ की,आन बान बस शान की..
उन सब वीरों की जय बोलें..
छुड़ा दिए छक्के गोरों के,जो वहशी मक्कार थे।
पायक जिनके बने हुए कुछ,घर के ही ग़द्दार थे।।
धूल धूसरित कर दी आभा,उन सबके अभिमान की..
उन सब वीरों की जय बोलें..
हमें करा आज़ाद गए वे,भले बिराने देश में।
अमर शहादत किंतु रहेंगी,
मातृभूमि परिवेश में।।
उनकी ऋणी सदैव रहेगी,जनता हिंदुस्तान की..
अब भी कुछ ग़द्दार चल रहे,
बर्बादी की राह पर।
जाग भारती वालो फेरो, पानी उनकी चाह पर।।
मिल बाहें मज़बूत करो सब,
भारत के सुल्तान की..
उन सब वीरों की जय बोलें,
जय-जय हर बलिदान की।।
अंजना सिन्हा ‘सखी
राष्ट्रीय साहित्यकारा,
रायगढ़, छत्तीसगढ़




