साहित्यिक

पहलगाम आतंकी हमला पर कविता

बेहद दुःखद! पहलगाम आतंकी हमला 

विधा /स्वरचित: काव्य

 

यहाँ चारों तरफ सन्नाटा छाया है,

आतंकियों ने पुन: उत्पात मचाया,

कभी पुलवामा तो कहीं पहलगाम

पाकिस्तानी आतंकी घुस आया |

 

निहत्थों-निर्दोषों को बलि चढ़ाया,

पत्नी के आगे पति को मार गिराया,

छोटे-छोटे बच्चों पर तरस भी नहीं आया,

आतंकियों ने धर्म पूछ कर गोली चलाया |

 

ये कैसा भाईचारा निभा जाते हो,

जिसका खाया, उसे ही मार जाते हो,

तुम निष्ठुर! निर्मम हत्या के हत्यारे हो,

खून से लतपथ! तुम गलियारे हो |

 

370 हटाने पर बौखला गये हो,

कश्मीर को पुन: अपना बता गये हो,

अब दिन में, सपना देखना छोड़ दो,

भारत के स्वाभिमान संग खेलना छोड़ दो |

 

आइटम बम की धमकी देते हो,

बूँद-बूँद पानी के लिए तरसते हो,

मज़हबी आतंक को बढ़ावा देते हो,

भारत में किस हक़ से तुम रहते हो | |

 

:- श्रीमती ज्योति राघव सिंह

भारतीय कवयित्री-लेखिका

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वर्तमान पता: लेह- लद्दाख

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