रेवा साहित्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न

रेवा साहित्य मंच की मासिक काव्यगोष्ठी मरहई माता दरबार कौड़िया में चन्द्रभान मालवी के मुख्यातिथ्य व कविवर भगवत सिंह धानक की अध्यक्षता में आयोजित की गयी।माँ सरस्वती के पूजन अर्चन व वरिष्ठ कवि टी आर उरधेया द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से काव्य गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।सेवानिव्रत शिक्षक उमाशंकर अग्रवाल ने पहलगाम घटना पर अपने विचार कहे।फाग कवि शंकरलाल बैरागी ने प्रथम मनाऊं दादा हनुमंत रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। वरिष्ठ कवि पी.एस.पुराणिया ‘पांचाल’ ने दुनिया का रखवाला है प्रभु ,डोर सबकी पकड़े रचना कही। गाडरवारा से पधारे काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे शिक्षक कवि मलखान सिंह मेहरा ने चांद और सूरज धर्म का भेद जानते,रोज रक्त के गोले बरसते सुनाकर वाह वाही लूटी।वरिष्ठ कवि गोविंद गलीच ने चाह रहा कब से जग भ्रष्टाचार का खात्मा रचना सुनायी।रविदास नवगैंया ने कबीर वाणी प्रस्तुत की।वरिष्ठ कवि टी आर उरधेया सजल ने आईने को देख मत खुद को आईने में देख रचना सुनाकर तालियाँ बटोरी। कविवर भगवत सिंह धानक ने शास्त्र वेदों, पुराणों की जननी हो तुम गीत सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। चन्द्रभान मालवीय ने संकलित रचना सुनाई।वहीं बृन्दावन बैरागी कृष्णा ने क्या मिल जाता है किसी की जान लेने से,परमात्मा ने सृष्टि बनाई स्नेह प्रेम समर्पण है गहने से कविता सुनाई।अन्नू दुबे,नोनकरन खंगार,आलोक,आदित्य की उपस्थिति प्रशंसनीय रही।सभी कवियों द्वारा पहलगाम में हुई घटना को मौन श्रध्दांजलि अर्पित की।




