शाइस्ता परवीन और कृष्णा राम शायद आपको याद नहीं होंगे, लेकिन आपके जहां में ब्रजेश ठाकुर होंगे। इसमें 10 नाम शामिल हैं, जिनमें दिल्ली की साकेत कोर्ट की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने एलियंस को सजा सुनाई थी। बिहार को कलंकित करने वाली उस जघन्य घटना पर बनी फिल्म रिलीज होने वाली है।
जी हाँ, बिहार के कब्रिस्तान में बने कब्रिस्तान, कांड और शर्मनाक हकीकत को अब बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया जा रहा है। ऐसी ही सच्ची घटना पर आधारित हिंदी फिल्म ‘शेल्टर होम’ का टेलिकॉम लॉन्च किया गया है, जिसे लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। फिल्म के निर्देशक नीरज कुमार हैं, जो कि लॉन्ग टाइम की मेहनत रंग लाई है, और यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 12 दिसंबर को मूवी रिलीज के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह फिल्म उस जघन्य कांड को दर्शाती है, जिसे बिहार के इतिहास का एक काला अध्याय माना जाता है। निर्देशक नीरज ने अपनी इस फिल्म के माध्यम से उस गार्जियन होम के अंदर हुई बर्बरता, क्रूरता और मौत की चीखें दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
इस सांकेतिक और राजनीतिक रूप से जोखिम जैसे विषय पर फिल्म बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था। यह घटना इसलिए भी हुई थी क्योंकि इसमें कथित तौर पर कई श्वेतपोश नेता और खाकी समर्थक की विचारधारा थी, जिसमें से कुछ आज भी समाज में ‘शरीफ’ घूम रहे हैं। फिल्म में इन गठजोड़ों को बेनकाब करने का साहस दिखाया गया है।
इस फिल्म का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक और खुशी की बात यह है कि बिहार के रोहतास जिले के लाल जय शुक्ला ने इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है। पत्रकारिता जगत में अपना एक किरदार और चेहरे के बावजूद जय शुक्ला अब इसी फिल्म के अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं। वह मूल रूप से रोहतास के चेनारी मंदिर के छोटे से गांव चेनपुरा से आते हैं। निर्देशक नीरज का दावा है कि ‘शेल्टर होम’ देखने के बाद समाज को सीता और प्रशासन (खाकी कुमार) का एक ऐसा चेहरा देखने को मिलेगा, जो अब तक छिपा हुआ है।