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सूरज पर थूक फेंकने से अपने चेहरा पर थूक पड़ता है

सूरज पर थूक फेंकने से अपने चेहरा पर थूक पड़ता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे स्वयंसेवी संगठन, जिसके मिशन में करोड़ नौजवान अपनी जवानी को राष्ट्र को समर्पित कर दिया। सनातन संस्कृति की विकृतियों को दूर करने एवं सामाजिक समरसता का भाव जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करने वाला संगठन, देश के दुर्गम क्षेत्रों में आदिवासी एवं कमजोर संप्रदाय के व्यक्तियों का शोषण से मुक्त कर राष्ट्रीयता की भाव को अलग जगह कर व्यक्ति का निर्माण करना। भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करना, राहुल गांधी को जानकारी नहीं है गोवा की मुक्ति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हैदराबाद के निजाम शाही के विरोध में भारत में हैदराबाद के विलय के लिए जन आंदोलन का नेतृत्व संघ की प्रेरणा से किया गया। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी आरएसएस के नीतियों को नजर अंदाज जरूर करते थे मगर इसके कटु आलोचक नहीं थे। राहुल गांधी का लोकसभा में दिया हुआ संबोधन अपने आप में बार-बार आरएसएस के शब्द को गलत ढंग से व्याख्या करना, पूरे देशवासी को अच्छा नहीं लगा। संघ समाज को जोड़ता है और समाज के बीच में जो खाई था उसको मिलने का काम करता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संग मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है और जब प्रेरणा मर जाता है तो व्यक्ति का जीवन समाप्त समझा जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के राष्ट्रीयता का प्राण वायु है। समाज में शिक्षा का भारतीयकरण और राष्ट्रभक्त संघ के विचारों से उत्पन्न हुआ है । डॉक्टर केशव राव बलराम राव हेडगेवार जो रस के संस्थापक रहे, वह कांग्रेस पार्टी के विदर्भ प्रांत के अध्यक्ष पद पर अपने जीवन काल में आसीन रहे। राहुल गांधी भारत के आजादी में अपनी जो भूमिका निभाया, उसे वह अपमान कर रहे हैं। देश का विभाजन, हिंदुओं का नरसंहार, पाकिस्तान के क्षेत्र से कुशलता पूर्वक हिंदू सिख इसाई गैर मुस्लिम को छोड़कर सभी को भारत में लाने का काम किया। कोलकाता में गोपालपाठा नहीं होते बंगाल के हिंदुओं का नरसंहार नहीं रुकता, तभी उन्होंने लोगों के लिए सुरक्षा प्रदान किया। सोहराब वर्दी के साथ चाय की चुस्की पर जो कांग्रेसी धर्मनिरपेक्षता का भाव व्यक्त करते थे, वह हिंदू समाज के लिए अपमानजनक रहा। कन्याकुमारी में सागर के भीतर द्वीप विवेकानंद का स्मारक बनवाना और उनका उद्घाटन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया, एकनाथ रानाडे जैसे कर्मयोगी संघ के संघ के माध्यम से समाज में भारत की यादगार प्रेरणा स्रोत बनाया जो सड़क पर हरि के रूप में आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। भारत के भविष्य के लिए परम पूज्य विवेकानंद ने सागर में तैर कर उसे टीला तीन दिनों तक बिना अन्य पानी के रहकर भारत के वर्तमान भविष्य की ओर चिंतन किया था, ज्ञान की ज्योति को अलग जगह कर दुनिया से भारत को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया। भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ करता है। हर जीव के प्रति हर जीवन में संवेदनाओं का समन्वय एवं संस्कार संघ से मिलता है। संघ के विचारों को लेकर हमारे जैसे कितने नौजवान अपनी जवानी खफा कर इस राष्ट्र के निर्माण में आम अपनी भूमिका निर्वाह किया है। सदैव सत्यम शिवम सुंदरम एवं भारत माता की जय खाने वाले, शिवाजी महाराणा प्रताप जैसे आदर्श महान व्यक्तित्व का वारिस है हम लोग । संघ के लिए अपना जीवन है और जीवन संग में है। संघ का स्वयंसे अपने भावनाओं का आलेख, संतोष कुमार राय अधिवक्ता व्यवहार न्यायालय रोसरा जिला समस्तीपुर

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