“गौरैया एक अधूरा आंगन” पुस्तक का हुआ भव्य ऑनलाइन विमोचन

वाराणसी, राष्ट्रीय कवि स्पर्श मंच साहित्यिक पटल के तत्वावधान में दिनांक 4 अगस्त 2026 को सायं 8:00 बजे एक भव्य ऑनलाइन काव्य व विमोचन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संपादक आदरणीय श्रीराम राय जी के काव्य संकलन “गौरैया एक अधूरा आंगन” का शुभ विमोचन देश भर से जुड़े प्रतिष्ठित साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदे की वंदना से हुई, जिसे आदरणीया शहाना परवीन जी ने अपनी सुमधुर वाणी से प्रस्तुत किया— “नमन मां शारदे, ज्ञान का आधार तू, तू ही जगत की कल्याणी।”
समारोह का कुशल संचालन मंच के उत्तर प्रदेश सचिव एवं वाराणसी के वरिष्ठ कवि रामबहाल सिंह ‘बहाल’ जी ने किया। उन्होंने अपनी पंक्तियों से गौरैया और प्रकृति प्रेम को जीवंत करते हुए पढ़ा: “प्रकृति प्रेम की पंक्षी रोज बैठ मुंडेरवां।
चहकती फुदकती है अनुराग में भोरवां।।”

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख साहित्यकारों व अतिथियों ने पुस्तक और संपादक के प्रयासों पर अपने विचार व्यक्त किए:
गीता पाण्डेय ‘अपराजिता’ ने पुस्तक को सराहा और काव्य पंक्तियां प्रस्तुत कीं— “मेरे आंगन की गौरैया, तुम फुदक-फुदक कर आती हो, मेरे मन को भाती हो।”
संजय गुप्ता ,चतरा, ने श्रीराम राय जी को शिक्षक समाज का प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास साहित्य को समृद्ध करते हैं।
डाॅ. मीना परिहार (अग्निशिखा मंच) ने गौरैया के विलुप्त होने पर चिंता जताते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की— “ओ री पंक्षी प्यारी गौर चिरइया… तू कहां लुप्त हो गयी।”
शिखा पाण्डेय (प्रदेश अध्यक्ष, उ.प्र.) ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए गौरैया को प्रकृति का “चुनिंदा परिंदा” बताया।

अन्य विशिष्ट अतिथि के रूप में ललिता जोगाड़, किरन अग्रवाल, जयंती शुक्ला एवं ईश्वरचंद विद्यासागर जी ने भी प्रकृति असंतुलन, वृक्षों की कटाई और गौरैया के संरक्षण पर अपने विचार रखे व पुस्तक के घर-घर पहुंचने की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के अंत में पुस्तक के संपादक आदरणीय श्रीराम राय जी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया:”ना चौखट ना खाट रहा, वन को निष्ठुर काट रहा…खोया हुआ वो बचपन अपना, फिर गौरैया चहचहायेगी।”
कार्यक्रम का समापन काव्य-गीत प्रस्तुतीकरण, पर्यावरण रक्षा के संकल्प और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह उप संपादक श्री सुरेश विद्यार्थी ने पुस्तक की प्रशंसा करते कहा कि यह एक अमूल्य पुस्तक है।



