कविता शीर्षक : ” मौसम बड़ा सुहाना “

मौसम बड़ा सुहाना
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पात-पात पर मोती बरसे मौसम बड़ा सुहाना।
हरी-भरी बगिया महकी है भ्रमर हुआ दीवाना।।
पेड़ों पर पंछी का डेरा तितली फूल-बसेरा।
पुष्प लतायें झूल रही है बाँधे तरुवर घेरा।।
कानन कोकिल कूक रही है ढूँढे मोर ठिकाना।
पात-पात पर मोती बरसे मौसम बड़ा सुहाना।।
सावन की बरखा जब होती पावस बरसे मेघा।
चातक चहके निशा निहारे नदी बढ़ाती रेखा।।
कृष्ण मुरलिया छेड़ रही है प्रेमिल पवन तराना।
पात-पात पर मोती बरसे मौसम बड़ा सुहाना।।
झींगुर-दादुर घर से निकले देख घटा अलबेली।
टिम-टिम जुगनू चमक रहे हैं टोली चली सहेली।।
रात घनेरी देख चातकी ओस लगे मस्ताना।
पात-पात पर मोती बरसे मौसम बड़ा सुहाना।।
सागर से उठती है लहरें नदियाँ उफने सारी।
सावन में नहरें भरती हैं भरती जाती क्यारी।।
सखियाँ झूला-झूल रही हैं गाती गीत तराना।।
पात-पात पर मोती बरसे मौसम बड़ा सुहाना।।
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रिंकु दुबे वैष्णवी
राजभाषा विभाग
बीसीसीएल, धनबाद




