ठंड में वृद्धि और तापमान में गिरावट के साथ-साथ प्रदूषण स्तर में भी तेजी से वृद्धि हुई है। शहर के हवा में प्रदूषणकारी तत्वों की मात्रा बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डर्बी का एयर स्केलेर स्टॉक (AQI) 170 के करीब पहुंच गया है, जिसे “खराब” श्रेणी में माना जाता है। शहर के विभिन्न स्थानों पर लगे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेंसरों से मिले डेटा भी बढ़ते प्रदूषण की पुष्टि कर रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में शहर के कई इलाकों को “खराब” श्रेणी में दर्ज किया गया है। हवा में खतरनाक आर्सेनिक, लेड और निकेल जैसे खतरनाक तत्व शामिल हैं। कच्चे तेल के कच्चे माल से बने कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर किसानों ने की अपील।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों का AQI इस प्रकार दर्ज किया गया है:
- अतरदाहा: 167
- एमआईटी: 168
- समाहरणालय: 167
- डीपीपुर कोठी: 166
इन उभरते आंकड़ों को देखते हुए खतरनाक सितारे जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में तारों की हवा और भी खराब हो सकती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन एवं नगर निगम रिक्तियां पर हैं। हालाँकि राहत की बात यह है कि पिछले दो वर्षों में शहर में प्रदूषण का स्तर कम हुआ और स्थिति में सुधार देखा गया। लेकिन पिछले दो दिनों से AQI में लगातार बढ़ोतरी से बच्चों और बुजुर्गों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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नगर निगम एवं जिला प्रशासन ने बढ़ते प्रदूषण से समाधान की तैयारी शुरू कर दी है। जिन इलाकों में AQI ज्यादा है, वहां पानी का स्प्रिंकलर से बर्बाद हो जाएगा। इसके अलावा कूड़ा-मिट्टी, प्लास्टिक सामग्री और अन्य प्रदूषणकारी तत्वों को भी हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने कहा कि नगर निगम निगम की ओर से प्रदूषण को लेकर बेहद गंभीर स्थिति है। इस दिशा में लगातार काम किया गया है, जिसका परिणाम है कि पिछले दो वर्षों में बेहतर सुधार हुआ है। कुछ इलाकों में AQI बढ़ा है, जिस पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के आंकड़े लगातार सक्रिय हैं और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।