अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस

प्रतिवर्ष 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1993 में इसकी शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य परिवार को समाज की सबसे मजबूत इकाई के रूप में पहचान देना है। परिवारों पर आने वाली विपरीत परिस्थियों पर बात करना है। इस वर्ष 2026 का थीम “परिवार, असमानताएं और बाल कल्याण” है, जो इस बात पर केंद्रित है कि आय, शिक्षा और डिजिटल पहुंच में बढ़ती असमानताएं बच्चों को कैसे प्रभावित करती हैं। ऐसे में उन्हे सबसे अधिक हमारी और हमारे प्रेम की जरूरत है।
भारतीय संस्कृति ने सदा “वसुधैव कुटुम्बकम्” को सर्वोपरि रखा है। परिवार सिर्फ खून के रिश्तों को नहीं कहते, बल्कि त्याग, प्रेम और सहयोग के बंधन को कहते हैं। आज आधुनिकता और भागदौड़ भरी जिंदगी ने परिवार का स्वरूप बदल दिया है। एकल परिवार बढ़ रहे हैं, वार्तालाप घट रहा है। दादी-नानी की कहानियाँ लुप्त हो रही हैं। कहानियों के नाम पर यूट्यूब कुछ भी परोस रहा है और बच्चे उससे हृदय से जुड़ते जा रहे हैं। माता-पिता और बच्चों के बीच मोबाइल दीवार बनकर खड़ा है।
परिवार दिवस का अर्थ जिम्मेदार होना है अपने परिवार, अपने समाज तथा अपने अपनों के प्रति। आइए हम संकल्प लें कि हम अपने बुजुर्गों और बच्चों को समय देंगे, बच्चों को संस्कार सिखाएंगे और रिश्तों में संवेदना का संचार करेंगे। क्योंकि सुंदर और सशक्त परिवार से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव हैँ। परिवार हमारे जीने की मुख्य वजह है। हम अपनी जीवन शैली बदल सकते हैं परिवार नहीं।
✍️प्रिया श्रीवास्तव
लिलुआ, हावड़ा
पश्चिम बंगाल




