हाँ ! मैं भारत माता हूँ

हाँ ! मैं भारत माता हूँ
*मैं भारत माता हूँ…*
आर्यावर्त की जननी,
इतिहास की गर्जना,
कृष्ण की तर्जनी,
रघुनंदन की तरिणी,
भव-भय तारिणी,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
हिमालय की चोटी हूँ,
जम्बू-द्वीप में सोती हूँ,
कश्मीर में रोती हूँ,
पंजाब की खेती हूँ,
कन्याकुमारी तक जागती हूँ,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
मेरी छाती में बहती निर्मल धारा,
गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी,
गोदावरी, नर्मदा, सोन, कोसी,
ब्रह्मपुत्र, दामोदर की धारा,
भेड़ाघाट, डल झील, रिहंद, भाखड़ा-नांगल,
सरदार सरोवर – सब हैं श्रृंगार मेरा,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
मुगलों ने सदियों सताया,
अंग्रेजों ने खूब थर्राया,
गुलामी में मुझे तड़पाया,
मेरे वीर पुत्रों ने मुझे बचाया,
हँसते-हँसते फांसी को गले लगाया,
तब जाकर आजादी का दिन आया,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
मेरी छाती लहू-लुहान है,
शिवाजी, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, रणजीत सिंह के शौर्य से,
बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, खुदीराम बोस के बलिदान से,
भगत, आजाद, बिस्मिल, अशफाक, सुखदेव, राजगुरु के लहू से,
मंगल पांडेय, लक्ष्मीबाई, कुंवर सिंह, तात्या टोपे के तेज से,
लाला, बाल, पाल और वीर अब्दुल हमीद से,
नेताजी और लाखों गुमनाम शहीदों के खून से,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
आज मैं स्वच्छंद, आजाद हूँ,
मेरे शेर सैनिकों पर मुझे नाज है,
मेरी उर्वर धरती सोना अनाज उगाती है,
लाल किले पर तिरंगा ही मेरा ताज है,
महादेव-महाकाल ही मेरे सरताज हैं,
विश्वगुरु होने का मुझमें आज भी राज है,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
वेद, पुराण, रामायण, गीता, महाभारत मेरा ज्ञान है,
न्याय और धर्म-युद्ध से भरा मेरा इतिहास महान है,
बुद्ध और गांधी का शांति संदेश मेरी पहचान है,
सनातन संस्कृति का शाश्वत उपदेश मेरी वाणी है,
केसरिया-भगवा अनादि से मेरा परिधान है,
साधु-संत, आचार्य-शंकराचार्य मेरे ही संतान हैं,
*मैं भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
मेरी आँखों के सामने हिमालय, कंचनजंघा, नंदा देवी,
त्रिशूल, विंध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, नीलगिरि, अन्नामलाई, सह्याद्रि,
ये पर्वत मालाएं ही मेरी हरियाली और खुशहाली की प्रेरणा हैं,
*मैं भारत माता हूँ!*
*हाँ, मैं ही भारत माता हूँ…*
अशोक चक्र से सजा मेरा भाल है,
विशाल भारत ही मेरी ढाल है,
मैं ही महाकाली, मैं ही महाकाल हूँ,
राम मेरे, कृष्ण मेरे, हनुमान मेरा ही कपाल हैं,
यह धरती मेरी जलती हुई मशाल है,
*मैं ही भारत माता हूँ!*
*मैं भारत माता हूँ…*
खुश हूँ कि आज तुम तिरंगा फहराओगे,
खुशी मनाओगे, मिठाइयाँ बाँटोगे,
पर फिर भी मैं बहुत दुखी हूँ,
सोचती हूँ, कल फिर वही करोगे?
अपराध, हत्या, लूट, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी,
मुनाफाखोरी, शिक्षा में कदाचार फिर अपनाओगे?
जियो और जीने दो, सत्य, अहिंसा, अनुशासन कब अपनाओगे?
कब इस कलंक के भार से मुझे मुक्त कराओगे?
*हाँ! मैं भारत माता हूँ… हाँ! मैं ही भारत माता हूँ…*
— आचार्य संजय सिंह ” चंदन ”
राष्ट्रीय साहित्यकार,
धनबाद, झारखंड




