साहित्य और संवेदना का संगम: ‘अर्धांगिनी: एक काव्य यात्रा’ का भव्य लोकार्पण

रोसरा, समस्तीपुर। साहित्य मनुष्य की संवेदनाओं का दर्पण होता है, जो समाज और रिश्तों की बारीकियों को शब्दों के माध्यम से जीवंत करता है। इसी कड़ी में, रोसरा की पावन साहित्यिक धरा पर वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि संजीव कुमार सिंह की नवीनतम काव्य कृति ‘अर्धांगिनी: एक काव्य यात्रा’ का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक पुस्तक का विमोचन मात्र नहीं था, बल्कि मिथिलांचल के प्रबुद्ध साहित्यकारों और विचारकों का एक वैचारिक समागम सिद्ध हुआ।
गरिमामयी मंच और विशिष्ट अतिथि
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् अवधेश्वर प्रसाद सिंह ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि संजीव जी की लेखनी में पत्रकारिता की सजगता और एक कवि की कोमलता का अद्भुत समन्वय है। समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. शिवशंकर प्रसाद सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘अर्धांगिनी’ का अर्थ केवल जीवनसंगिनी नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो पुरुष के अस्तित्व को पूर्णता प्रदान करती है। संजीव जी ने अपनी कविताओं में इसी पूर्णता और समर्पण को स्वर दिया है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित लक्ष्मी नारायण झा एवं सुरेन्द्र झा ने साहित्य के गिरते स्तर के बीच ऐसी मौलिक रचना के आगमन को शुभ संकेत बताया। साहित्यकार अनिरुद्ध झा ‘दिवाकर’ ने अर्धांगिनी एक काव्य यात्रा एक कुशल दाम्पत्य जीवन का सच है।मंच का कुशल और काव्यमयी संचालन सुप्रसिद्ध उद्घोषक रामस्वरूप सहनी ‘रोसड़ाई’ ने किया, जिन्होंने अपनी वाकपटुता से पूरे समारोह में उत्साह बनाए रखा।
काव्य संगोष्ठी: सुरों और शब्दों की सरिता
लोकार्पण के पश्चात एक भव्य काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय और क्षेत्रीय साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। संगोष्ठी में जीवन के विभिन्न रंगों—प्रेम, संघर्ष, सामाजिक विसंगतियों और मानवीय मूल्यों—पर आधारित कविताओं का पाठ किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख साहित्यकारों में:
अनिरुद्ध झा ‘दिवाकर’, मनोज झा शशि, तृप्ति नारायण झा, और शंकर सिंह सुमन, अमित मिश्रा ने अपनी गंभीर और मर्मस्पर्शी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कृष्ण कुमार सिंह, मैथिल माधव, सत्यनारायण यादव, और संतोष कुमार राय ने छंदबद्ध और समसामयिक विषयों पर आधारित कविताओं से खूब वाहवाही बटोरी।
नकी समस्तीपुर, कैलाश प्रसाद मनोहर, दिनेश्वर दिनेश, मोहन पटवा, और लक्ष्मी कुमार सहित दो दर्जन से अधिक कवियों ने अपनी उपस्थिति से आयोजन को गरिमा प्रदान की।




