शिक्षक सुनील कुमार “खुराना” अपनी लेखनी से भारत में प्रसिद्ध

सुनील कुमार “खुराना” की कविता भारत की पावर ऑफ वन सितंबर 2025 ई-पत्रिका (Digital) में प्रकाशित हुई। इस ई-पत्रिका में भारत और विश्व के जाने-माने शासकों के द्वारा कार्य,फोटो और नाम भी प्रकाशित किए गए हैं। अब बात करते हैं कि पावर ऑफ वन सितंबर 2025 इस ई-पत्रिका में सुनील कुमार “खुराना” की कविता कैसे प्रकाशित हुई है। सुनील कुमार “खुराना” की कविता प्रकाशित होने का मूल कारण गुगल है। जहां से इस ई-पत्रिका के सम्पादक महोदय ने सुनील कुमार “खुराना” की इस कविता को लिया है। इस प्रकार से सुनील कुमार “खुराना” की कविता को इस ई-पत्रिका में प्रकाशित किया है। जब हमारे संवाददाता ने इस पत्रिका की गहनता से जांच की तो हमने जाना कि इस पत्रिका में विशेष रूप से भारत के सम्मानित प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का भी संदेश इस पत्रिका में विशेष रूप से प्रकाशित गया है।
सुनील कुमार “खुराना” उच्च प्राथमिक विद्यालय बाधी नकुड़ सहारनपुर में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। सुनील कुमार “खुराना” अपने दादा और पिता की लेखन और गायन की विरासत को आगे बढ़ाने में निरन्तर प्रयासरत हैं। सुनील कुमार “खुराना” सोचते रहते थे कि कैसे भारत और विश्व के महापुरुषों ने मानव जाति को विश्व शांति का संदेश दिया है। सुनील कुमार “खुराना” सहारनपुर ने विश्व के महापुरुषों की विचारधारा को गहराई से पढ़ा और एक प्रश्न मन में संजोया कि मैं भी महापुरूषों के सपनों को भविष्य में आगे बढ़ाने का कार्य करूंगा। सुनील कुमार “खुराना” अपनी लेखनी से समस्त जगत के सभी प्राणियों को निरंतर विश्व सुधार का संदेश दे रहे हैं।
जब हमारे संवाददाता की सुनील कुमार खुराना से बात हुई तो उनके द्वारा हमें बताया गया है कि मेरी कविताएं गूगल पर 180 प्रेषित की जा चुकी हैं। सुनील कुमार “खुराना” की कविताएं अमर उजाला ने अपने अखबार और वेबसाइट पर अपलोड की है। सुनील कुमार “खुराना” की कविताएं *सकारात्मक सोच* और *शाकाहार* विश्व के आठ लोगों ने गूगल पर सर्च किया और पढ़ा है।
जब हमारे संवाददाता ने सुनील कुमार खुराना से पूछा कि आप दिन में अपने विद्यालय के बच्चों को शिक्षण कार्य कराते हैं और लिखते कब हैं। तब सुनील कुमार खुराना ने हमें बताया कि मैं रात के समय में कुछ बेशकीमती समय निकालकर अपनी लेखनी से निरंतर लिखने का प्रयास करता रहता हूं।
उनकी इस उपलब्धि को प्राप्त करने में विशेष कर उनकी माता नगीनी देवी,पत्नी बेबी रानी और उनके बच्चों की विशेष भूमिका रही है। उनकी पत्नी बेबी रानी ने उनका सदा ही सुख-दुख में साथ दिया। कवि बनने की इस उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए शिक्षक जगत और समाज में एक खुशी की लहर है। आज वर्तमान में सभी शिक्षक अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। श्रीपाल, हरिदत्त शर्मा, सुनील कुमार कवात्रा, पंकज तंवर,संदीप सिंह पंवार, अमित कुमार,सचिन कुमार,कुलदीप सिंह रोहिला, राकेश नोटियाल,विक्रम सिंह, मानसिंह, सुनील कुमार,भानू प्रताप सिंह, साक्षी,दिव्या ज्योति आर्य,खुशी ज्योति आर्य, नैनसी ज्योति आर्य,उज्जवल धवल आदि




