पश्चिम कुणाल जिले के बगहा पुलिस जिला अंतर्गत धनहा थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में एक तूफान के चलते आखिरकार न्याय की जीत हुई है। स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट, बेतिया ने बुधवार को अस्वीकृत हरिद्वार चौधरी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उस पर 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह निर्णय पीड़ित परिवार की लंबे समय से चली आ रही न्याय की प्रतीक्षा का अंत लेकर आया।
अदालत में यह सिद्ध हो गया कि जिस पीड़ित की मृत्यु के बाद पूरे गांव को हिला दिया गया था, उसके साथ नैरल पूर्वाभास हुआ था। न्यायालय ने पाया कि साइबेरियाई और उसके साथियों ने पीड़ित को जंगल से पीट-पीट कर मार डाला, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। यह हमला किसी आवेश में नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। इसके अलावा, पीड़ित को उसकी जाति के आधार पर अपमान और धमकाया गया, जिससे उसकी परेशानी और भय और बढ़ गया।
अदालत में यह भी स्पष्ट हो गया कि पूरी घटना एक सहयोगी समूह द्वारा की गई थी और इसमें हरिद्वार में चौधरी की केंद्रीय भूमिका साबित हुई थी। यह मामला केवल अपराध की कहानियों को चित्रित करता है, बल्कि उस सामाजिक पीड़ा को भी प्रभावित करता है जिससे पीड़ित परिवार को लाभ होता है। जांच के दौरान कई कठिन परिस्थितियां सामने आईं। कई बार पीछे के साक्ष्य मिले, पारिवारिक घाटा था, लेकिन बगहा पुलिस ने मना नहीं किया। पुलिस ने हर सावधानी को सावधानी बरतने के लिए कहा, हर बयान को दर्ज किया गया और अदालत में पूरे दम के साथ पेश किया गया। पुलिस की यही दृढ़ता इस फैसले तक पहुंच में अंतिम पड़ाव रही।
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विशेष लोक अभियोजक विजय बहादुर सिंह ने अदालत में एक-एक प्रतीक को इस तरह रखा कि पूरी घटना की सच्चाई सामने आ गई। उनके घटिया कलाकारों ने अदालत को यह मजबूर किया कि पीड़ित को न्याय ही मिलना चाहिए। फैसले के बाद पीड़ित परिवार की रिहाई का नाम था, लेकिन चेहरे पर संतोष था। वर्षों के संघर्ष के बाद उन्हें लगा कि अब उनकी प्रिय आत्मा को शांति मिली है। पुलिस ने कहा कि यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि अत्याचार इतना भी गहरा क्यों न हो, कानून हमें कहीं अधिक मजबूत करता है।