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संविधान और हमारे कर्तव्य : उन्मुक्त उड़ान मंच पर गणतंत्र दिवस आयोजन

संविधान और हमारे कर्तव्य : उन्मुक्त उड़ान मंच पर गणतंत्र दिवस आयोजन

उन्मुक्त उड़ान मंच की संस्थापिका, अध्यक्षा व संचालिका आ. डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के मार्गदर्शन में 26 से 31 जनवरी 2026 तक भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर साहित्यिक आयोजनों का आयोजन किया गया।

इस श्रृंखला के अंतर्गत दिनांक 26 एवं 27 जनवरी 2026 को छंदमुक्त काव्य विधा में सृजन एवं तिरंगा परिधान में वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से मंच को सुशोभित किया गया। आयोजन का केंद्रीय विषय रहा—
“गणतंत्र केवल पर्व नहीं, प्रतिज्ञा है। जब नागरिक जागता है, तभी लोकतंत्र सजता है।”
इस आयोजन की प्रभारी डॉ. अनीता राजपाल ‘अनु वसुंधरा’ एवं आ. वसुंधरा जी रहीं।

इस अवसर पर उत्तम गणतंत्रीय परिधान में सज्जित 28 रचनाकारों ने सहभागिता की, जिनमें से 25 रचनाकारों ने अपनी वीडियो प्रस्तुतियाँ प्रेषित कीं। सभी सहभागियों को “काव्य श्री 2026 सम्मान” से सम्मानित किया गया।

विभिन्न रचनाकारों ने अपने-अपने काव्य स्वर में गणतंत्र की आत्मा, संविधान की गरिमा, नागरिक अधिकारों एवं कर्तव्यों पर सारगर्भित भाव प्रस्तुत किए—
विशेष शर्मा ‘सुहासिनी’ ने गणतंत्र को हर नागरिक की धड़कन कहा।
अशोक दोशी ‘दिवाकर’ ने बलिदानियों को नमन किया।
डॉ. फूलचंद्र विश्वकर्मा ‘भास्कर’ ने गणतंत्र को राष्ट्र जीवन का अनुशासन बताया।
नीतू गर्ग ‘कमलिनी’ ने विविधता में एकता को गणतंत्र की अद्भुत शक्ति कहा।
डॉ. अनीता राजपाल ‘अनु वसुंधरा’ ने संविधान को शहीदों के रक्त से लिखा गया अमर संकल्प बताया।
प्रवीणा सिंह राणा ‘प्रदन्या’ ने इसे आत्मा में जलती जिम्मेदारी की लौ कहा।
आशा बुटोला ‘सुप्रसन्ना’ ने कर्तव्यबोध को पूर्ण स्वराज का आधार बताया।नीरजा शर्मा ‘अवनि’ ने कथनी-करनी की एकरूपता पर बल दिया।
वीना टंडन ‘पुष्करा’ ने लोकतंत्र में भागीदारी को उसकी सुदृढ़ नींव कहा।
अरुण ठाकर ‘ज़िंदगी’ ने संविधान को अधिकारों की बाती बताया।
निशा कौल शर्मा ने मूलभूत अधिकारों को गणतंत्र का सार बताया।
सुरेश चंद्र जोशी ने मनसा-वाचा-कर्म से गरिमा बढ़ाने का आह्वान किया।
माधुरी शुक्ला ‘स्वरा’ ने गणतंत्र को प्रतिदिन मनाने की प्रेरणा दी।
संगीता चमोली ‘इंदुजा’ ने गणतंत्र को जनहितकारी व्यवस्था बताया।
सुनीता तिवारी ने जागरूक नागरिक को राष्ट्र की महानता का आधार माना।
संजीव भटनागर ‘सजग’ ने सेवा को लोकतंत्र की सुदृढ़ नींव कहा।
देवेश्वरी खंडूरी ने सर्वधर्म सम्मान को भारतीय पहचान बताया।
डॉ स्वर्णलता सोन ‘कोकिला’ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नारी सशक्तीकरण पर बल दिया।
डॉ. पूनम सिंह सारंगी ने नई पीढ़ी में जोश के साथ होश की आवश्यकता रेखांकित की।
आ. रंजना बिनानी ‘काव्या’ ने अवसरवादी राजनीति पर प्रहार करते हुए गणतंत्र को त्याग, तपस्या और गौरव का प्रतीक बताया।
आ. अनु तोमर ‘अग्रजा’ ने लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प को दोहराया।
डॉ. राम कुमार झा ‘निकुंज’ ने संविधान को लोककल्याण का अमृत स्रोत बताया।
सभी सम्मानित रचनाकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से गणतंत्र की अवधारणा को विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत करते हुए नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों एवं संवैधानिक दायित्वों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
इसी श्रृंखला में दिनांक 26 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक (सोमवार से शनिवार) आलेख विधा में साप्ताहिक आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है—
“भारतीय संविधान, अधिकार और आज के नागरिक”।
इस आयोजन की प्रभारी डॉ. पूनम सिंह सारंगी हैं।
आगामी आयोजनों में लाला लाजपत राय जयंती, विश्व कुष्ठ दिवस एवं शहीदी दिवस पर रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।
अंत में मंच की संस्थापिका डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने कार्यकारिणी तथा उन्मुक्त उड़ान परिवार के सभी सक्रिय, समर्पित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे वैचारिक व साहित्यिक आयोजनों के निरंतर आयोजन का आश्वासन दिया।

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