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गीत

गीत
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बादल यादों के थे मन में।
याद आयी उनकी सावन में।।
पड़ते थे बागों में झूले।
पेंगे ऐसी नभ को छू ले।।
साजन जब मुझे झुलाते थे,
फिरते थे हम फूले फूले।।
खुशियाँ थीं सारी जीवन में।
याद आयी उनकी सावन में।।
रिमझिम इठलाती वो बरखा
मन को हरषाती वो बरखा।।
जब आती थी चुपके चुपके,
भीगूँ फुसलाती वो बरखा।।
इक आग लगाती तन मन में।
याद आयी उनकी सावन में।।
अब भी जब आता है सावन।
हिचकी ले रोती मन ही मन।।
अब पीर कहूँ किससे दिल की,
परदेस बसे जब से साजन।।
कह लेती हूँ सब दरपन में।
याद आयी उनकी सावन में।।
अंजना सिन्हा “सखी ”
रायगढ़, छत्तीसगढ़




