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‘चलें छंद की ओर’ है बहुरंगी भावों,संवेदनाओं व संदेशों का समाहार:- सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र 

औरंगाबाद 31/12/25, हिंदी साहित्य भारती के तत्वावधान में स्थानीय निर्वाणा रेड होटल में कवि राकेश कुमार द्वारा संपादित सात रचनाकारों अनुपमा तिवारी,रीना प्रेम दूबे,सत्येन्द्र कुमार चौबे,रमेश कुमार सिंह,अनुज कुमार पाठक,नीरज कुमार पाठक व राकेश कुमार के दोहों से सुसज्जित साझा संकलन ‘चलें छंद की ओर’ का गरिमामय वातावरण में भव्य लोकार्पण हुआ। छंद शास्त्री श्रीधर द्विवेदी की अध्यक्षता व विद्या वैभव के सफल संचालन में मुख्य अतिथि सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र,शिक्षाविद शंभूनाथ पाण्डेय,पाटन बीडीओ अमित कुमार झा,डॉ सुशील कुमार पाण्डेय,डॉ आर.के.रंजन,लेखक सुरेन्द्र कुमार मिश्र, काष्ठ कलाकार प्रेम भसीन,युवा नेता व शिक्षाविद अविनाश देव,अमृत कौर,धनंजय जयपुरी,अरूण अग्रवाल, जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष सुरेश विद्यार्थी,अवकाश प्राप्त सीओ संतोष शुक्ला,के.के.मिश्रा,प्रभात मिश्र सुमन,डॉ राम किंकर त्रिवेदी,पंकज श्रीवास्तव व विद्या सागर शर्मा ने संयुक्त रूप से ‘चलें छंद की ओर’ का लोकार्पण किया।अनुपम स्कूल आफ आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन की छात्राओं ने सरस्वती वंदना में नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी। स्वागत उद्बोधन डॉ रामप्रवेश पंडित ने जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. धनंजय पाठक ने किया। विषय प्रवेश शिक्षक परशुराम तिवारी ने किया।मुख्य अतिथि सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र ने ‘चलें छंद की ओर’ के रचनाकारों को बधाई देते हुए दोहों का सम्यक विश्लेषण किया। उन्होंने कवि राकेश कुमार के पुस्तक के संपादन व संयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की। कहा कि ‘चलें छंद की ओर’ बहुरंगी भावों,संवेदनाओं व संदेशों का समाहार है।प्रख्यात लेखक सुरेन्द्र कुमार मिश्र ने कहा पुस्तक के सभी कवियों के अपने रंग,अपने रूप,अपनी पंखुड़ियां,अपनी सुगंध,अपनी आभा हैं जो दोहों के एक ही उद्यान में खिले हुए हैं। उन्होंने परिवर्तन के लिए समाज में साहित्य के प्रसार पर बल दिया।शिक्षाविद व समाजसेवी शंभूनाथ पाण्डेय ने सातों रचनाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘चलें छंद की ओर’ ने एक बार फिर साबित किया कि पलामू की धरती साहित्यिक रूप से बहुत ही उर्वर है। पाटन बीडीओ अमित कुमार झा ने कबीर के दोहे को साझा करते हुए कहा कि हिंदी का स्वरूप व स्वभाव समावेशी है। यह पुस्तक भी समावेशी भावों से ओत-प्रोत है।राष्ट्रीय सेवा मंच के प्रियरंजन पाठक समर्पण,मानस मिश्र और प्रेम प्रकाश दूबे ने सातों रचनाकारों को सम्मानित किया।

डॉ आर.के.रंजन ने कहा कि ‘चलें छंद की ओर’ हिंदी जगत के पटल पर नया अध्याय है।माटी कला बोर्ड के सदस्य अविनाश देव ने कहा कि ‘चलें छंद की ओर’ में साहित्य की अंतर्निहित शक्तियां विद्यमान हैं। ऐसे कार्यक्रमों को छात्रों के बीच भी ले जाना चाहिए।विदुषी अमृत कौर ने कहा कि यह सुखद है कि आपने अपने दोहों में पर्यावरण को विषय बनाया गया है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि प्रदूषण की त्रासदी से मुक्ति पर भी कार्य किया जाय।उड़ान आईएएस एकेडमी के निदेशक अरुण अग्रवाल ने अपनी कविता के माध्यम से पुस्तक के सभी सात रचनाकारों को साहित्यिक आकाश के चमकते सितारे कहकर सराहना की।इस मौके पर एमजे अजहर,अमीन रहबर,श्यामलाल उरांव,छेदी नंदन मिश्र, ,विजय पाठक द्विज, सिद्धेश्वर सिंह,अशोक मिश्र,घनश्याम कुमार,सुनील विश्वकर्मा,शीला श्रीवास्तव,राहुल सिंह,अश्लेष पांडेय,ललन प्रजापति,अशोक चौबे,अमन चक्र,उदय भानु तिवारी,रिषु प्रिय,प्रेम प्रकाश,सुरेन्द्र चंद्रवंशी सचेत,रथिंद्र नाथ झा,मिंटू प्रसाद, कुमार अखिलेश, आदर्श राज विजय कुमार ठाकुर सहित अनेक साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही।

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