जनेश्वर विकास केंद्र के तत्वावधान में अगस्त क्रांति दिवस का आयोजन किया गया

भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार की भूमिका रही अहम्
देव में क्रांतिकारियों की याद में हुयी संगोष्ठी कहा पटना सचिवालय की शहादत सबको रहेगी याद
सूर्य नगरी देव में जनेश्वर विकास केंद्र देव के तत्वावधान में सहदेव चौधरी पुस्तकालय में अगस्त क्रांति दिवस का आयोजन किया गया l देश की आजादी में भारत छोड़ो आंदोलन की भूमिका पर संगोष्ठी हुयी l जिसमे जिले के बुद्धिजीवियों नें भाग लिया l भारत छोड़ो आंदोलन में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. उन्होंने स्कूल और कॉलेज छोड़कर आंदोलन का साथ दिया. कई युवाओं ने सरकारी संस्थानों का बहिष्कार किया. युवाओं ने गुप्त पर्चे बांटे. टेलीफोन और तार व्यवस्था को बाधित किया. सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए. वे संदेश-वाहक के रूप में भी काम करते थे. कई स्थानों पर युवाओं ने समानांतर प्रशासन बनाने की कोशिश की. महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी जी नें प्रकाश डालते हुए कहा की 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय में तिरंगा फहराने के प्रयास के दौरान औरंगाबाद (खरांटी) के जगतपति समेत अन्य क्रांतिकारियों की शहादत की खबर प्रदेश में पहुंची तो सम्पूर्ण विहार मेआंदोलन और उग्र हो गया। औरंगाबाद जिले में भी कई दिनों तक प्रदर्शन और विरोध का दौर चला। इसी तरह *नौ अगस्त से शुरू हो गया था आजादी का आंदोलन* भागलपुर में नौ अगस्त से ही शिवधारी सिंह, सुखदेव चौधरी, मेवालाल झा और रामेश्वर लाल अग्रवाल समेत अन्य क्रांतिकारियों की अगुआई में आंदोलन शुरू हो गया था। 12 अगस्त को सरकारी भवन पर तिरंगा फहराया गया। इक़बाल एहमद जी नें बताया की जयप्रकाश नारायण के आजाद दस्ते से प्रेरणा लेकर भागलपुर-बांका क्षेत्र में कई भूमिगत क्रांतिकारी संगठन सक्रिय थे। भागलपुर में बनारसी लाल और सुल्तानगंज तिलकपुर के सियाराम सिंह दल, बौंसी में परशुराम दल तथा बांका में महेंद्र गोप दल ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ मोर्चा संभाल रखा था। इन दलों की गतिविधियों की चर्चा ब्रिटिश पार्लियामेंट तक हुई थी। डॉ महेन्द्र हार्ड नें बताया की भागलपुर व बांका में अगस्त क्रांति का असर में 1142 लोग जेल भेजे गए,463 क्रांतिकारियों को हुई सजा,तीन क्रांतिकारियों को दी गई फांसी,250 लोगों ने पुलिस-सेना की गोली से दी शहादत,20 थानों पर आंदोलनकारियों ने किया हमला,13 वर्ष की उम्र में मुंशी साह हुए शहीद l शिक्षक वीरेंद्र सिंह जी नें कहा 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि इसमें शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। इस क्रन्तिकारी दिवस को यादगार बनाने के लिए बलिराम सिंह चंद्रवंशी, गंगा शर्मा, अनिल सिंह, डॉ महेंद्र हार्ड, विनय चंद्रवंशी, किरण मेहता,पश्चिमी केताकी समिति सदस्य चन्दन सिंह, निर्मल सिंह, दीपक गुप्ता, राकेश सिंह, महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी, इक़बाल एहमद नें प्रमुख भूमिका निभाई l




