रजनी शिवचंद्र गुप्ता : एक समर्पित शिक्षिका और शोधार्थी

रजनी शिवचंद्र गुप्ता एक प्रतिभाशाली शिक्षिका, शोधार्थी और रचनाकार हैं जो हिंदी साहित्य में बिना किसी शोर-शराबे के धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रही हैं। उनका जन्म 19 सितंबर 1980 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। स्कूली जीवन से ही उन्हें शिक्षा के प्रति गहरी रुचि रही है। माता -पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के मार्गदर्शन के कारण वे आज इस मुकाम तक पहुंची हैं।
रजनी जी ने मुंबई स्थित सोमैया कॉलेज से डी.एड. करने के पश्चात वर्ष 2005 में माटुंगा स्थित एस.आई.ई.एस. विद्यालय में सह-शिक्षिका के रूप में कार्यभार ग्रहण किया, जहाँ वे वर्तमान में भी कार्यरत हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और पिल्लई कॉलेज से बी.एड. किया। वर्तमान में वे एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय से पीएच.डी की उपाधि प्राप्त करने हेतु शोधकार्य कर रही हैं।
रजनी जी का शोधकार्य बाल शोषण जैसे गंभीर विषय पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य समाज और अभिभावकों में बालकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है। उनका मानना है कि आज का बालक कल का सजग और सज्जन नागरिक बनेगा, अतः देश को एक विवेकपूर्ण, योग्य और स्वस्थ नागरिक देने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
रजनी जी ने अपने जीवन को शिक्षा और साहित्य के लिए समर्पित किया है और वे सदैव छात्र-छात्राओं की सहायता के लिए तत्पर रहती हैं। उन्होंने अनेक शोधालेख लिखे और प्रकाशित किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं— “समकालीन उपन्यासों में परिलक्षित बाल समस्या”, “अनौपचारिक शिक्षा और समाज : एक दृष्टिकोण”, “सोना चौधरी के सामाजिक उपन्यास ‘पायदान’ में बाल विमर्श”, “भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का बाल संरक्षण और विकास में योगदान” और “सुशीला टाकभौरे कृत दलित विमर्श पर आधारित उपन्यास’ वह लड़की’ में चित्रित बाल शोषण”।
रजनी शिवचंद्र गुप्ता समाज को संदेश ~
“बाल शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करें। शिक्षा और संवेदनशीलता के माध्यम से हम एक बेहतर समाज बना सकते हैं। आइए, मिलकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाएं।”




