राष्ट्रीय चेतना की प्रखर कवयत्री डॉ गीता पांडेय अपराजिता को मिली काशी हिंदी विद्यापीठ द्वारा विद्यासागर की मानद उपाधि

वाराणसी किंग होटल बनारस में अखिल भारतीय कवि लेखक एवं कलाकार परिषद के तत्वावधान में भव्य अलंकरण समारोह एवं विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया कार्यक्रम के संयोजक प्रख्यात व्यक्तित्व कवि साहित्यकार श्री इंद्रजीत तिवारी निर्भीक जी थे। इस अवसर पर रायबरेली से पधारी वरिष्ठ हिंदी प्रवक्ता (उपप्रधानाचार्य) व राष्ट्रीय चेतना की प्रखर कवयित्री डॉ गीता पांडेय अपराजिता एवं प्रयागराज की धरती से पधारे राष्ट्रीय धारा के प्रखर कवि डॉ वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर को
विद्यापीठ के कुलपति डॉ संभाजी राजा राम राम बाविस्कर कुल सचिव श्री इंद्रजीत तिवारी के कर कमलो द्वारा दोनों साहित्यकारों का विद्यासागर मानद उपाधि के साथ भव्य अलंकरण किया गया। एक शाम शहीदों के नाम कवि सम्मेलन की श्रृंखला में डॉ गीता पांडेय अपराजिता ने अपनी ओज पूर्ण कविताओं से *लिखा अन्याय हो जिसमें पृष्ठ वो फाड़ देती हूं* *कलेजा चीरकर अरि का तिरंगा गाड़ देती हूंँ।।* सुनाकर श्रोताओं में एक नई चेतना का संचार कर ऊर्जा से भर दिया एक के बाद एक कई रचनाएं शहीदों के प्रति समर्पण में इन्होंने प्रस्तुत कर लोगों में उत्साह का संचार किया और शहीदों के प्रति सभी के अंदर श्रद्धा के भाव अपनी रचनाओं के द्वारा जागृत कर स्रोताओं को तालियांँ बजाने के लिए विवश कर दिया। इसी कड़ी में राष्ट्रीय चेतना के प्रख्यात कवि डॉक्टर वीरेंद्र सिंह कुसुमाकर जी ने अपनी कविताओं से जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है इसके लिए बलिदान होना चाहिए इसी के साथ युग ऐसे वीर सपूतों का इतिहास रचा करता है सुनाकर श्रोताओं के हृदय में राष्ट्रीय भावना प्रवाहित की और खूब तालियांँ बटोरी काशी हिंदी विद्यापीठ के पदाधिकारी ने कवियों कवयित्रियों को प्रशस्ति पत्र स्मृति चिन्ह शाल्यार्पण व माल्यार्पण कर उनका भव्य अभिनंदन किया। उक्त अवसर पर सुदूर से आए अनेक कवि एवं कवयित्रियों ने भी काव्य पाठ लोगों को आह्लादित किया। युवा कवि अमित शर्मा आनंद ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर वाराणसी के तमाम सम्मानित गणमान्य व्यक्तित्व एवं साहित्यकार कवयत्रियांँ कवि गण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन ख्यातिलब्ध साहित्यकार इंद्रजीत तिवारी निर्भीक जी ने किया।




