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मानवता

मानवता अपने आप में एक बहुत ही व्यापक विषय है। मानवता का अर्थ अपने आप में स्पष्ट है। यदि घर में मानवता नहीं रहती तो घर में जीना दुर्लभ हो जाता है। मानव को एक दूसरे के विचारों को महत्व देना चाहिए। मनुष्य एक दूसरे की भावनाएं समझकर एक दूसरे का सहयोग करें।
मानवता ऐसे व्यक्ति में पाई जाती है जो व्यक्ति चरित्रवान,सदाचारी हो और अन्य बहुत से अच्छे गुण ऐसे मनुष्य में पाए जाते हैं यदि हमें अपने जीवन को सुख में बनाना है तो हमें मानवता के रास्ते पर चलना है। मानवता का रास्ता बहुत ही सरल और सुगम है। संसार के प्रत्येक प्राणी को अपने इस मानव के जीवन में किसी भी कीमत पर निरर्थक और उद्देश्यहीन नहीं होने देना चाहिए।
मनुष्य को सबके मंगल की कामना करनी चाहिए और वेद में भी लिखा है कि-
“सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि प पश्यंतु मा कश्चित दुःखभाग् भवेत्।।”
मनुष्य को मानव जाति पर ही नहीं बल्कि जीवों पर भी मानवता दिखानी चाहिए। मनुष्य अपने इस जीवन में अपने कर्तव्य के पथ पर सत्य के रास्ते पर चलकर ईमानदारी से रहे। सभी प्राणियों से बिना भेदभाव के व्यवहार करें। मनुष्य किसी पर भी अत्याचार नहीं करें। सभी मनुष्य सबके प्रति प्रेम रखें। संसार के प्रत्येक प्राणी को सबके प्रति दया का भाव रखना चाहिए। मनुष्य यदि वास्तव में सब के प्रति सहानुभूति, अच्छे संबंध,और रिश्तो का पोषण रखता तो वह व्यक्ति मानवतावादी कहलाए। यदि मानव कर्तव्यनिष्ठ,विनम्रतावादी,चरित्रवान उदारवादी,परिश्रमी है तो वहीं व्यक्ति मानव कहलाने का हकदार होगा।
संसार के सभी प्राणियों में एक ही जीव का वास है। प्रत्येक प्राणी के अंदर रक्त का संचार है। सभी मनुष्यों को एक दूसरे को सहयोग करना चाहिए।
सत्य कहावत भी है कि..
” मानव मानव एक समान
फिर भेद क्यों करें इंसान ”
आइए हम सब मिलकर यह कसम खाएं कि हम अपने अंदर मानवता के गुणों को और अच्छी तरह संजोएगे। इससे पूरे संसार मैं प्रत्येक प्राणी एक दूसरे को सहयोग करें और सब मिलजुल कर रहे।
कलमकार
स्वरचित और मौलिक आलेख
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

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