बहते क्षणों का आलिंगन जीवन की सहजता का काव्य-दर्शन काव्य की समीक्षा

*”‘बहते क्षणों का आलिंगन’:*
*जीवन की सहजता का काव्य-दर्शन”*
*काव्य की समीक्षा -*
“भारतीय संस्कृति के रक्षक, सामाजिक समानता एवं एकता के प्रतीक”, आध्यात्मिक चिन्तक, महनीय दार्शनिक व साहित्यकार, मानवतावादी युगपुरुष “कविवर सूर्य जी” की प्रेरणादायक कविता ‘बहते क्षणों का आलिंगन’ पर आधारित मेरी समीक्षा यहाँ प्रस्तुत है –
*मूल भाव :*
‘बहते क्षणों का आलिंगन’ यह काव्य एक लघुकविता है। जिसमें कविवर ने, जीवन की क्षणभंगुरता तथा सहजता की अनिवार्यता के प्रति अपने विचार व्यक्त किए हैं। इस कविता में,काव्य के माध्यम से, कविवर मनुष्यों को तनावमुक्त रहकर जीवन जीने हेतु प्रेरित करते हैं, यह बताते हैं कि “बोझ रहित जीवन ही वास्तविक जीवन है। मनुष्यों को चाहिए कि वे जीवन के विभिन्न उतार-चढ़ावों को सहजता से स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते चलें।” जीवन का प्रत्येक पल अविरल बहता रहता है। प्रत्येक पल अविरल बहता रहता है, उसमें कहीं कोई ठहराव नहीं होता। इन बहते पलों से प्रेम करके, मनुष्यों को खुलकर तथा हँसते हुए जीना चाहिए। कविवर सूर्य जी का दर्शन है कि यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं होता; केवल स्मृतियाँ ही शेष रह जाती हैं। इसलिए, प्रत्येक क्षण को यादगार बनाकर सहेजकर रखना चाहिए।
*काव्य की भाषा :*
सहज, सरल तथा भावपूर्ण है। इसकी छोटी-छोटी पंक्तियों में, जीवन का गूढ़ रहस्य उजागर होता प्रतीत होता है। कविता में, संस्कृतनिष्ठ शब्दों की बहुलता है, जैसे : ‘क्षण’, ‘आलिंगन’, ‘अवशेष’ और ‘स्मृतियाँ’।”
*कवयित्री,लेखिका व समीक्षिका -*
*दर्शना ‘दिव्यांशी’*
*हिसार,(हरियाणा)*




