पटना जिले के दानापुर दियारा स्थित मानस गांव में रात एक हादसा हुआ। रात करीब 9 बजे जब परिवार के सभी सदस्य खाना खा रहे थे तभी अचानक पुराना मकान भरभराकर गिर गया। इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।
मृतक की पहचान मूर्ति के रूप में हुई है। कि स्टैच्यू के पांच भाई हैं, जो अन्य सभी राज्यों में बताए गए हैं कि साहूकार कैसे काम करते हैं। उनकी साथ भाभियाँ और माँ भी बाहर रहती हैं, इस कारण वे इस दुर्घटना का शिकार होने से बच गईं। गांव वालों का कहना है कि अगर सभी घर पर संकट आ गया तो शायद पूरा परिवार खत्म हो जाएगा।
30 साल पुराने मकान, इंदिरा आवास योजना से बनाया गया था
मृतक की भाभी गुलशन खातून ने बताया कि यह मकान करीब 30 साल पहले इंदिरा आवास योजना के तहत बनाया गया था। समय-समय पर घर की दीवारों और छतों के साथ कई जगहों पर दरारें देखी गईं। इसी कारण से परिवार के अन्य सदस्यों ने घर को ठीक करने के लिए बगल के खाली हिस्सों में स्टॉक में रहने का निर्णय लिया था। लेकिन मूर्ति अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पुराने मकान में ही रह रही थी। किसी ने नहीं सोचा था कि वह मकान उसकी मौत की वजह बन जाएगा।
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मकान के दरवाजे से मच गई चीख-पुकार
पड़ोसी राम मंगन राय ने बताया कि रात करीब 9 बजे जब मूर्ति अपनी पत्नी रोशनी खातून और बच्चों के साथ सोई थी, तब अचानक ही स्थायी आवाज के साथ पूरा मकान धराशायी हो गया था। आवाज सुनी गांव के लोग मछली पकड़ने की मशीन पर देश, लेकिन तब तक पैसे खत्म हो गए थे। सभी शव सामान के नीचे दबे हुए थे। रिएलिटी ने किसी तरह के डोरस्टोरी स्टोर्स, उनकी पत्नी और बच्चों के आभूषणों को बाहर निकाला।
गरीबी ने छीन ली जिंदगी
जैसा कि कहा गया है, प्रोटोटाइप आर्थिक रूप से बहुत कमजोर था। पैसे तंगी के कारण उसने मकान की वसूली नहीं कराई और न ही नए मकान का निर्माण कर पाया। यही कारण है कि पूरे परिवार के जंगलों के नीचे दबकर खत्म हो गया। घटना की सूचना मिलने के बाद भी अब तक कोई भी बड़ा अधिकारी या स्मारक कंपनी नहीं पहुंची है। इस बात को लेकर नवीनतम में बताया गया है कि दुर्घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली।
गाँव तक पहुँचने के लिए नदी पार करना है
स्थानीय लोगों ने बताया कि दानापुर से नदी पार करने के लिए मानस गांव तक पहुंचना जरूरी है। सुदूरवर्ती गांव तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है। इसी वजह से राहत और अवसाद के काम में भी देरी हो रही है।