बिहार में अंतिम चरण के मतदान के लिए मतदान केंद्र सरगर्मी चरम पर है। गाजी जिले के हर नुक्कड, चौपाल और खेत-खलिहान में एक ही चर्चा है कि राम की जीत अपनी साख कैसे बचेगी? क्या कांग्रेस अपने प्रदेश अध्यक्ष को जीत दिलाकर अपनी प्रतिष्ठा में बरकरार रखेगी? जी, मगध और गढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायकों की साख और कांग्रेस की प्रतिष्ठा पर दांव लगा है। वहीं, संस्थागत शहर से कांग्रेस उम्मीदवार आनंद शंकर और बीजेपी उम्मीदवार त्रिविक्रम सिंह की टक्कर है।
परीक्षक की छह वेबसाइट पर विशेषज्ञ परीक्षा
मंत्री इमाम अपनी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के सभी छह मंदिर इमामगंज, बाराचट्टी, सेंट्रल रुकरी, सिकंदरा, अटारी और कुटुंबा में दो मंदिरों से जमा हुए हैं। इमामगंज में उनकी बहू दीपा मस्जिद, बाराचट्टी में दीपा की मां ज्योति देवी मैदान में हैं। दस्तावेज़ पर सिद्धांत की राजनीति की परीक्षा भी हैं।
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दो बार के प्रतिनिधि की प्रतिष्ठा दर पर
कुटुंबा सीट कांग्रेस की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। यहां पिछले दो बार से विधायक प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम फिर से मैदान में हैं। इनमें सबसे सामने के हम प्रतियोगी ललन राम हैं। कांग्रेस ने जमीन से हटने के लिए सेना को पूरी तरह से शहीद कर दिया है।
जी में बदला हुआ जातीय गुणांक
गाजी-बोधगया क्षेत्र में जातीय गुणांक पहले जैसा नहीं रहा। दलित, महादलित और अति पिछड़ा वर्ग के वोट इस बार बंटे हुए हैं। मुस्लिम-यादव के दोस्त पर भरोसा है, तो उसकी तलाश के पक्ष में मजबूत पकड़ दिखती है।
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होगा तय सत्ता का गुणांक
दूसरे चरण में जोसेफ और कांग्रेस दोनों का भविष्य इन छह पदों पर वर्जित है। अगर विश्वनाथ की पार्टी तीन से ज्यादा सीटें जीतती है, तो वह मजबूत स्थिति में होगी। जहां, कांग्रेस कुटुंब जीतती है, तो यह उसके औषधीय पौधों के लिए बड़ी राहत होगी। मगध की धरती पर यह चुनावी लड़ाई बन चुकी है।