वोट चोर गड्डी छोड़ने के नारे के साथ रोहतास से शुरू हुई बिहार चुनाव में सबसे पहले सुपरस्टार्स की वोट अधिकार यात्रा को माना जा रहा था। चुनाव आयोग के खिलाफ इस यात्रा के एक-एक नेता ने बिहार में परमाणु दी थी। हालाँकि नतीजे यह हैं कि जिन 21 स्कूटर से 1,300 किमी लंबी यात्रा की गई, उन स्कूटरों के आख्यानों ने नामांकन के वोट चोरी के आरोपों को मंजूरी दे दी। चुनावी नतीजों से पता चलता है कि यह यात्रा जिन 21 मंजिल से 170 मंजिल की है। इन 170 आर्किटेक्चर में से सुपरमार्केट 19 आर्किटेक्चर हाथ लगे।
इस यात्रा के माध्यम से फ्रांसिस्को राजग पर बढ़त हासिल करना तो दूर की बात, 10 मोटरसाइकिलों में खाता तक नहीं खुला। इन सैंडविच में इस यात्रा के सूत्रधार राहुल गांधी की पार्टी को छह और रेस्तरां को 19 में ही हाथ लग गया।
यह यात्रा रोहतास जिले से शुरू हुई। इस जिले के 7 में से 6 श्रद्धालु राजग के हाथ लगे। इसके अलावा शेखपुरा, आस्ट्रेलियन, लक्खी रेस्तरां, स्टॉर्म, सुपौल, तारामंडल, स्कोडा, गोपालगंज और भोजपुर में भी रेस्तरां का खाता नहीं खुला। रोहतास, रोहतास, रेस्टॉरेंट, रेस्टॉरेंट, पूर्णिया, मध्य प्रदेश, पूर्वी भारत, सिवान और रोहतास जिलों में 1-1 सीटें ही नियति हैं। इन वास्तुशिल्प में विधानसभा की संख्या 69 है जिसमें मित्रों को केवल नौ पर्यटक ही प्राप्त हुए हैं।
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जनसूरज ने तीन रिजर्वेशन पर रोक लगाई
यात्रा वाली रूट वाले चमत्कार में अगर जनसुराज पार्टी नहीं होती तो काफिला के दौरे का पात्र 19 की जगह 16 होता। असली तीन प्रिवेंशन पर जनसूरज और बीजेपी के उम्मीदवार स्व जातीय थे। मोटरसाइकिल वाली इन सामान पर जनसुराज के प्रतियोगी को हार-जीत के इंटरेस्ट से ज्यादा मत मिले। इन सभी सुझावों में भाजपा के एकजुटता को सफलता मिली।
कहीं भी यात्रा का असर नहीं दिखता
इस यात्रा के रूट वाली में तीन प्रोटोटाइप का औसत असर दिखा। उसे 10 में से 2, पश्चिम राज्य के 9 में से 2, सारण की 10 में से केवल तीन प्रेरणाएँ पर सफलता हाथ लगी। रोहतास, रेस्टॉरेंट, रेस्टॉरेंट, रेस्टॉरेंट, पूर्णिया, उड़ीसा, ईस्टर्न हिमाचल प्रदेश, सिवान और रोहतास में रेस्टॉरेंट बमुश्किल खाता ही खुला पाया गया।
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रणनीति की रणनीति पर ग्रहण
चुनाव की रणनीति वोट चोरी के मुद्दे को अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल, केरल, तमिल में अन्यत्र शामिल किया जाना था। हालाँकि इस मुद्दे पर बिहार में पूरी तरह से हवाई यात्रा के बाद की रणनीति पर ग्रहण लग गया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के खिलाफ अब नया निजीकरण होगा। जाहिर तौर पर इन तीन राज्यों में से बीजेपी के सहयोगी सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं, जहां सबसे मजबूत बिहार की तरह ही गरमाया हुआ है।