BiharUPदिल्ली

मुहूर्त दुर्गा पूजा का विशेष विश्लेषण 

2025 की आश्विन दुर्गा पूजा का विशेष विश्लेषण

———————————————————-

यों तो एक वर्ष यानि 365 दिन में नौ-नौ दिन के 40 नवरात्र होते हैं,जिसमें 04 नवरात्र मुख्य माने गये हैं। (01) आश्विन शुक्ल पक्ष का नवरात्र ,जिससे शारदीय नवरात्र कहते हैं।(02) चैत्र शुक्ल पक्ष का नवरात्र, जो वासंतिक नवरात्र कहलाता है।(03) आषाढ़ शुक्ल पक्ष का नवरात्र और (04) माघ शुक्ल पक्ष का नवरात्र, जो गुप्त नवरात्र के अन्तर्गत आता है।यह दोनों गुप्त नवरात्र विशेषतः साधकों एवं तांत्रिकों के लिए प्रसिद्ध है।सामान्य जन भी इन नवरात्रि में साधना-उपासना करते हैं।

इन चार नवरात्र में दो नवरात्र आश्विन और चैत्र सर्व जन समुदाय के लिए सर्व सुलभ है।इन दो नवरात्र में शारदीय नवरात्र विशेष रूप से प्रमुख है।श्रीदुर्गासप्तशती के बारहवें अध्याय के बारहवें एवं तेरहवें श्लोक में भगवती स्वयं कहती हैं कि शरत्काल में जो वार्षिक महापूजा की जाती है,उस अवसर पर जो मेरे इस माहात्म्य/श्रीदुर्गासप्तशती को भक्तिपूर्वक सुनेगा,वह मनुष्य मेरे प्रसाद से मुक्त तथा धन,धान्य एवं पुत्र से सम्पन्न होगा– इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। यथा,

शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी।

तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्तिसमन्वितः।।

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।

मनुष्योमत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः। ।

नवरात्र/दशहरा में भगवती जगत् जननी जगदम्बा दुर्गा जगत् कल्याण के लिए धरती पर पधारती हैं और सबका कल्याण करती हैं। इसलिए यह दुर्गा पूजा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

दुर्गा पूजा को ,दशहरा, नवरात्र या फिर नवरात्रि के नाम से जानते हैं। भगवती महिषमर्दिनी के नव रूपों की पूजा नवरात्रि के नव दिनों में होती है।मूलतः प्रतिपदा से दशमी तक चलने वाली यह पूजा दशहरा कहलाती है।”दश पाप हरा दशहरा स्मृता”जीवन के दश पापों के हरण करने वाली है दशहरा।

(01) कलश स्थापन

———————————————————-

इस वर्ष आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा दिनांक 22/09/2025 सोमवार को पड़ रहा है।प्रतिपदा रात्रि 01:18 तक है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पूर्वाह्न 11:20 तथा इसके बाद हस्त नक्षत्र समस्त है तथा शुक्लयोग रात्रि 08:57 तक है। श्री हृषीकेश पंचांग एवं श्री महावीर पंचांग के अनुसार प्रातः काल से सूर्यास्त पूर्व तक कलश स्थापन- पूजन एवं ध्वजारोपण होगा। यदि चौघड़िया मुहूर्त में कलश स्थापन करना चाहते हैं, तो (01) सूर्योदय 05:49 से प्रातः 07:19 तक अमृत चौघड़िया (02) प्रातः 08:49 से 10:19 तक शुभ चौघड़िया तथा (03) अपराह्न 02:49 से 04:19 तक लाभ चौघड़िया मुहूर्त में कलश स्थापन कर सकते हैं। (04) अभिजित् मुहूर्त मध्य काल में होता है यानि अपराह्न 11:49 से 12:49 तक कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त है। श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ कलश स्थापन के बाद प्रारम्भ हो जाएगा।

(02)विल्वाभिमंत्रण और नव पत्रिका प्रवेश

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

श्रीहृषीकेश पंचांग के अनुसार दिनांक 27/09/2025 शनिवार को पंचमी उपरांत षष्ठी को सायं काल में बिल्वाभिमंत्रण यानि विल्व वृक्ष के पास आवाहन एवं पूजन व आमंत्रण होगा। इसके तीसरे दिन दिनांक 29/09/2025 सोमवार को नवपत्रिका प्रवेश एवं पूजन – स्थापन होगा और इसी दिन महा निशा पूजा होगी। निशिथकाल रात्रि 11:36 से 12:13 तक मान्य है। निशा पूजा इसी दिन रात्रि निशिथकाल में होगी।रात्रि जागरण भी इसी दिन होगा।

श्रीमहावीर पंचांग के अनुसार 28/09/2025 रविवार को ज्येष्ठा नक्षत्र में षष्ठी तिथि प्रातः 10:43 के अंदर बिल्वाभिमंत्रण होगा एवं 29/09/2025 सोमवार को सुबह में नवपत्रिका प्रवेश एवं पूजन – स्थापन होगा।

(03) संधि बलि का एवं हवनादि का समय

—————————————————–

दिनांक 30/09/2025 मंगलवार को अष्टमी अपराह्न 01:45 तक है।संधि बलि इसी समय होगी।

01/10/2025 बुधवार को अपराह्न 02:35 तक नवमी तिथि है। इसलिए इसी दिन नवमी पर्यन्त हवनादि कार्य सुसम्पन्न होंगे।

(04)दुर्गा विसर्जन एवं विजयादशमी

———————————————–

दिनांक 01/10/2025 बुधवार को अपराह्न 02:36 से दशमी तिथि का प्रवेश हो रहा है, जो दिनांक 02/10/2025 गुरुवार को अपराह्न 02:56 तक रहेगा। श्रीहृषीकेश पंचांग और श्रीमहावीर पंचांग के अनुसार दोनों दिन विजयादशमी मान्य है। दिनांक 02/10/2025 गुरुवार दशमी तिथि को श्रवण नक्षत्र प्रातः 06:14 में प्रवेश कर रहा है, जो दिनांक 03/10/2025 शुक्रवार को प्रातः 06:53 तक रहेगा। अतः दुर्गा विसर्जन/प्रतिमा विसर्जन एवं विजयोत्सव/ विजया दशमी दिनांक 02/10/2025 गुरुवार को मनाया जाएगा।

(05) देवी का आगमन

————————————

देवी के आगमन की तीन विचार धाराएँ हैं:–

(क)श्री हृषिकेश पंचांग के अनुसार प्रतिपदा जिस दिन होता है( कलश स्थापन के दिन) वही दिन भगवती के आगमन माना जाता है।इस वर्ष प्रतिपदा दिनांक 22/09/2024 सोमवार को है।इसलिए,” शशि सूर्ये गजारूढ़ा ” यानि भगवती ” हाथी ” पर आऐंगी, जो ” गजे च जलदा देवि ” – सुवृष्टि कारक है।आगमन शुभ है,मंगलकारी है।

(ख) बंगमतानुसार भगवती का आगमन षष्ठी तिथि को माना जाता है।षष्ठी तिथि रविवार को है।भगवती का आगमन ” शशि सूर्ये गजारूढ़ा “के अनुसार भगवती हाथी पर आऐंगी, जिसका फल है ” गजे च जलदा देवि ” यानि सुवृष्टि कारक, मंगलकारी है।

(ख) श्री महावीर पंचांग भगवती का आगमन सप्तमी को मानते हैं। सोमवार को सप्तमी है। इसलिए भगवती का आगमन ” शशि सूर्ये गजारूढ़ा ” अर्थात् भगवती हाथी पर आयेंगी, जो ” गजे च जलदा देवि ” यानि सुवृष्टि कारक है।

तीनों मतों से भगवती महामाया हाथी पर सवार होकर आयेंगी, जो सुवृष्टि कारक है, मंगलकारी है।

लेकिन, कलश स्थापन के दिन यानि प्रतिपदा के दिन के अनुसार भगवती के आगमन सर्वमान्य माना जाता है।

———————————————————

(06) देवी का प्रस्थान

———————————-

दिनांक 02/10/2025 गुरुवार को विजयादशमी है। गुरुवार को भगवती का प्रस्थान होगा। ” सुरराजदिने यदिसा विजया ,नर वाहन देवि करी शुभदा ” यानि गुरुवार को भगवती की सवारी नर वाहन पर प्रस्थान कर रही हैं, जो शुभद है,मंगलकारी है

सर्वमान्य नियमानुसार भगवती का आगमन और प्रस्थान दोनों मंगलकारी है।

—————————————————

(07) दुर्गा अष्टमी व्रत की विशेष जानकारी

—————————————————

दिनांक 30/09/2025 मंगलवार को दुर्गा अष्टमी व्रत है। इसे ही महाऽष्टमी व्रत कहते।उपवासादि व्रत एवं अष्टमी पूजन इसी दिन किया जाएगा।

लेकिन, जिनको पुत्र संतानें हैं, वे दुर्गाष्टमी व्रत उपवास नहीं करें। जिनकी पुत्र संतानें नहीं हैं,वे दुर्गाष्टमी व्रत उपवास करें।

आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों ? क्या इसका कोई शास्त्रीय प्रमाण है ? हमलोग परम्परा वश तो दुर्गाष्टमी उपवास व्रत करते आ रहे हैं। शास्त्र प्रमाण के आधार पर धार्मिक कृत्य करने चाहिए। इसी प्रमाण को यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

सबसे पहले यह जान लिजिए कि सप्तमी युक्त अष्टमी व्रत नहीं करना चाहिए ।

शरन्महाष्टमी पूज्या नवमी संयुता सदा।

सप्तमी संयुता नित्यं शोकसंतापकारिणीम्।।

सप्तमी युक्त अष्टमी शोक संताप देने वाली होती है। इसे शल्य कहा जाता है : —

सप्तमी कलया यत्र परतश्चाष्टमी भवेत्।

तेन शल्यमिदं प्रोक्तं पुत्र पौत्र क्षयप्रदम्।।

शल्य युक्त अष्टमी कंटक अष्टमी है , जो पुत्र पौत्रादि का क्षय करता है।आगे और भी स्पष्ट है : —

पुत्रान् हन्ति पशून हन्ति राष्ट्र हन्ति सराज्यकम्।

हन्ति जातानजातांश्च सप्तमी सहिताष्टमी।।

सप्तमी सहित अष्टमी व्रत पुत्रों को नाश करती है , पशुओं को नाश करती है, राष्ट्र / देश तथा राज्य का नाश करती है। और , उत्पन्न हुए और न उत्पन्न हुए का नाश करती है।

सप्तमी वेध संयुता यैः कृता तु महाष्टमी ।

पुत्रदार धनैर्हीना भ्रमयन्तीह पिशाचवत्।।

सप्तमी वेध से युक्त महा – अष्टमी को करने से लोग इस संसार में पुत्र , स्त्री तथा धन से हीन होकर पिशाच के सदृश भ्रमण करते हैं तथा : —

सप्तमीं शैल्यसंयुक्तां मोहादज्ञानतोऽपि वा ।

महाष्टमीं प्रकुर्वाणो नरकं प्रतिपद्यते।।

मोह – अज्ञान से शल्य युक्त / सप्ती से युक्त महाष्टमी को जो करता है , वह नरक में जाता है। इसलिए, स्पष्ट है कि सप्तमी युक्त अष्टमी उपवास व्रत नहीं करना चाहिए।

इस वर्ष सप्तमी दिनांक 29/09/2025 सोमवार को अपराह्न 12:36 तक सप्तमी है,उसके बाद अष्टमी तिथि है।इसलिए सप्तमी युक्त अष्टमी उपवास व्रत नहीं करना है।ऊपर में इसका प्रमाण दिया गया है।

लेकिन , दुर्गाष्टमी उपवास किसे करना चाहिए और किसे नहीं करना चाहिए,यह जानना अत्यावश्यक है : —

कालिका पुराण में स्पष्ट कहा गया है , जो निर्णय सिन्धु पृष्ठ संख्या 357 में उद्धृत है :—

अष्टम्युपवासश्च पुत्रवता न कार्यः।

उपवासं महाष्टम्यां पुत्रवान्न समाचरेत्।

यथा तथा वा पूतात्मा व्रतीं देवीं प्रपूज्येत्।।

अर्थात अष्टमी तिथि में उपवास पुत्रवाला न करे। जैसे – तैसे पवित्र आत्मा वाला व्रती देवी की पूजा करे। यानि स्पष्ट है कि जिनके पुत्र संतान हैं वे लोग दुर्गाष्टमी को उपवास व्रत नहीं करें।

लेकिन, वैसे लोग जिनके पुत्र संतान नहीं हैं , वे सभी भक्तगण पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से दुर्गाष्टमी का उपवास व्रत करें। महाभागवत ( देवीपुराण ) अध्याय 46 श्लोक संख्या 30 एवं 31 में स्पष्टतः देवी का आदेश है :—

महाष्टम्यां मम प्रीत्यै उपवासः सुरोत्तमाः।

कर्तव्यः पुत्रकामैस्तु लोकैस्त्रैलोक्यवासिभिः।।

स्वयं माँ भगवती कहती हैं कि मेरी संतुष्टि के लिए तीनों लोकों में रहने वाले लोगों को महाष्टमी के दिन पुत्र की कामना से उपवास करना चाहिए । ऐसा करने से उन्हें सर्वगुण सम्पन्न पुत्र की प्राप्ति अवश्य होगी।

अवश्यं भविता पुत्रस्तेषां सर्वगुण समन्वितः।

लेकिन, उस दिन पुत्रवान लोगों को उपवास व्रत नहीं करना चाहिए :—

पुत्रवद्भिर्न कर्तव्य उपवासस्तु तद्दिने।।

दिनांक 30/09/2025 मंगलवार को महाअष्टमी उपवास व्रत होगा। यहाँ अष्टमी नवमी युक्त है।इसलिए महाअष्टमी का उपवास व्रत इसी दिन होगा। एवं दिनांक 01/10/2025 बुधवार को नवमी अपराह्न 02:35 के बाद दशमी तिथि में पारणा होगा।

यहाँ स्पष्ट कहा गया है कि अष्टमी घटी भर भी उदयकाल में नवमी युक्त ग्राह्य है।सप्तमी युक्त अष्टमी पुत्रवानों द्वारा त्याज्य है।यथा,

महाष्टमी घटिकामात्रप्यौदयिकी नवमीयुताग्रह्या।

सप्तमी स्वल्पयुता सर्वथा त्याज्या।

सप्तमीयुताष्टम्यां अत्रोपवासः पुत्रवतो निषिद्धः।।

माँ भगवती जगत् जननी सब का कल्याण करें , यही प्रार्थना है।

रवीन्द्र प्रसाद “दैवज्ञ ”

चतरा ( झारखण्ड)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button