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शब्दवीणा की मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता

भाषा एवं साहित्य के विकास में व्याकरण के महत्व पर हुई बातचीत

औरंगाबाद 19/2/26, राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की हरियाणा प्रदेश समिति एवं फरीदाबाद जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित फरवरी माह की आनलाइन साहित्यिक भेंटवार्ता ‘एक शाम, साहित्य के नाम’ में दिल्ली सरकार में हिन्दी के प्रवक्ता, लेखक व कवि डॉ जीतेंद्र सिंघल ने भाषा एवं साहित्य के विकास में व्याकरण के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने साहित्यिक एवं भाषायी एकरूपता तथा उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए व्याकरण की समझ का होना अनिवार्य बताया। साहित्य के धर्म, मर्म, उद्देश्य, भाषा के विस्तार, साहित्यिक क्षेत्र में शोध कार्य को बढ़ावा दिये जाने पर बातचीत हुई। “एक शाम साहित्य के नाम” की संचालन प्रभारी कवयित्री रिया अग्रवाल ने डॉ सिंघल से वर्तमान समय में शिक्षा और साहित्य के व्यवसायीकरण पर भी प्रश्न पूछे। डॉ. सिंघल ने एक कथाकार, एक लेखक तथा एक समीक्षक के दायित्वों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को कहानियों एवं कविताओं से जोड़े जाने की आवश्यकता पर विचार रखे। उन्होंने वार्ताकार श्रीमती अग्रवाल के अनुरोध पर अपनी कुछ पसंदीदा अभिनेता स्वरचित कविताएँ भी प्रस्तुत कीं।कार्यक्रम का संयोजन शब्दवीणा की हरियाणा प्रदेश सचिव एवं फरीदाबाद जिला समिति की संरक्षक कवयित्री सरोज कुमार ने तथा समन्वयन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक पर शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से हुआ, जिसका आनंद रामनाथ बेख़बर, सुनीता सैनी गुड्डी, सुरेश गुप्ता, आशा साहनी, ललित शंकर, मधु श्रीवास्तव, निगम राज़, प्यारचन्द कुमार मोहन, जैनेंद्र कुमार मालवीय, डॉ विजय शंकर, पंकज मिश्रा, डॉ रवि प्रकाश, हीरा लाल साव, रामकुमार प्रसाद, विकास कुमार भारद्वाज एवं देश के विभिन्न भागों से जुड़े साहित्यप्रेमियों ने उठाया।

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