समिधा पुकार रहीं है.पुस्तक का हुआ लोकार्पण

*शब्द शिल्पी सम्मान से नवाजे गए काशी के साहित्यकार*
– *”समिधा पुकार रहीं है… ” पुस्तक का हुआ लोकार्पण*
– *चेतना साहित्यिक मंच ने किया आयोजन*
वाराणसी : चेतना साहित्यिक मंच द्वारा शगुन बैंक्विट- पिंड बलूची रेस्टोरेंट रथयात्रा में रविवार को एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गयाl इस समारोह में जहां एक तरफ काशी के साहित्यकारों को शब्द शिल्पी सम्मान-2025 से नवाजा गया वहीं दूसरी तरफ विनय कुमार वर्मा कृत ललित निबंध संग्रह “समिधा पुकार रही है… ” का लोकार्पण भी हुआl
समारोह के मुख्य अतिथि निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ कियाl अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि काशी की साहित्यिक परंपरा बहुत पुरानी है और काशी भारत की सांस्कृतिक राजधानी हैl ऐसे में काशी के साहित्य श्रृंखला में कुछ नया जुड़ना गौरव की बात हैlउन्होंने समिधा का विस्तार से व्याख्या कियाl वेद पुराणों से भी उन्होंने उदाहरण दिएl
विशेष अतिथि के रूप में काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने भी कहा काशी के साहित्यकारों को सम्मानित करना साहित्य को बढ़ावा देने जैसा हैl चेतना साहित्यिक मंच यह करके एक अनोखा काम कर रही हैl विशेष अतिथि आकाशवाणी वाराणसी के कार्यक्रम प्रमुख अशोक पांडे जी ने कहा कि इस कार्यक्रम में आकर बहुत अच्छा लगा क्योंकि काशी के सारे साहित्यकारों से एक ही स्थान पर मुलाकात हो गईl यह हमारे आकाशवाणी में चल रहे मंजूषा कार्यक्रम के लिए उपयोगी साबित होगाl कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद सिंह जी ने कहा कि जीवन भी एक यज्ञ जैसा है और उस यज्ञ की समिधा हम सब हैंl हम सब अपने कर्मों की समिधा डालते हैं और बदले में जीवन में उन्नति व प्रगति पाते हैंl ललित निबंध संग्रह “समिधा पुकार रही है..” इन्हीं सब बातों को इंगित किया गया हैl
गंगा महासभा के संगठन मंत्री गोविंद शर्मा ने कहा कि साहित्यकार समाज के नब्ज को पकड़ते हैंl साहित्यकार अपनी लेखनी से समाज को सीख देते हैंl इसलिए साहित्यकारों का सम्मान होना ही चाहिए l
वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्र ने कहा कि चेतना साहित्यिक मंच की यात्रा जो चंदौली से शुरू हुई है आज वाराणसी पहुंची हैl वह दिन दूर नहीं जब यह अन्य जिलों में भी इसी तरह साहित्य से जुड़े लोगों के सम्मान करेंगेl लाल बहादुर शास्त्री स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिल यादव ने कहा कि ललित निबंध संग्रह में जो विषय है वह आम जीवन के विषय हैं इससे बहुत कुछ नई नया जानने को मिलेगाl वरिष्ठ साहित्यकार दीनानाथ देवेश ने भी अपने विचार व्यक्त कियाl
अतिथियों का स्वागत संतोष सिंह ने,कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनय कुमार वर्मा ने किया व धन्यवाद ज्ञापन रामजी प्रसाद भैरव ने कियाl
इस मौके पर प्रमोद सिंह समीर, दयाराम जायसवाल, प्रकाश चौरसिया, पीयूष मिश्रा, सूर्य प्रकाश मिश्रा, हाजी वसीम अहमद, एकलाक खान, जयप्रकाश धानापुरी, राजपाल सिंह, राम बहाल सिंह बहाल कवि, जया टंडन, आशिक बनारसी, प्रोफेसर इशरत जहां, भुलक्कड़ बनारसी, विजय शंकर पांडे, विजय चंद्र त्रिपाठी, झरना मुखर्जी, डॉ.वात्सल्य, डॉ रचना, दीपक दबंग सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे l




