चुनौतियों को मात देकर नया प्रतिमान स्थापित करने वाली नारियों में से एक – सुश्री माधुरी करसाल’मधुरिमा’

साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी सुश्री माधुरी करसाल अपनी रचनाओं और शिक्षा के माध्यम से समाज में विशिष्ट पहचान बना रहीं हैं। आज वे समर्पित शिक्षिका, समाज सेविका और साहित्यकार के रूप में जानी जाती है। उनके द्वारा कई पुस्तक लेखन (पद्य रचना एवं गद्य रचना) में सराहनीय योगदान दिया गया है। उन्होंने हिन्दी साहित्य, संस्कृत साहित्य और समाजशास्त्र विषयों पर स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। वे आदिम जाति कल्याण शासकीय प्राथमिक शाला छिंदभौना, विकास खंड-तमनार,जिला-रायगढ़, छत्तीसगढ़ में प्रधानाध्यापिका हैं। वर्तमान में श्री दावड़ा यूनिवर्सिटी रायपुर, छत्तीसगढ़ से हिन्दी विषय पर पार्टटाइम शोधकार्य कर रही हैं। बचपन से हिन्दी साहित्य के प्रति गहरी रुचि ने उन्हें लेखनी के क्षेत्र में संलग्न किया । वे गद्य और पद्य दोनों विधाओं (हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषा) में सृजन करतीं हैं। वे अपनी रचनाओं में जीवन के समस्त आयामों को उकेरने की कोशिश करतीं हैं। उनका विचार है कि साहित्य,समाज की दशा को सुधारने का साधन तथा सही दिशा देने का सर्वोत्तम माध्यम है । वे मानवीय मूल्यों, सामाजिक व सांस्कृतिक पहलुओं तथा समस्त समसामयिक संदर्भों पर अपनी कलम चलातीं हैं । उनकी पहली रचना भारत की नारी विभूतियाँ “रजिया सुल्तान” (मई,2024 ) और डॉ. बाबा साहेब बी. आर. अंबेडकर (2024) क्रमशः सुखमिला अग्रवाल ‘भूमिजा’ और डॉ विजय पाटिल की संपादकीय में प्रकाशित हुईं। माधुरी करसाल ‘मधुरिमा’ डॉ सीताराम आठिया, देवरी (मध्यप्रदेश) के 501 नि:शुल्क पुस्तक प्रकाशन योजना में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा जल-जंगल-जमीन और जीवन की रक्षा में आदिवासियों का संघर्ष, हिन्दी कविताओं में अभिव्यक्त आदिवासी विमर्श सहित लगभग तीस विषयों पर लेखनी कर चुकीं हैं। उनके इस योगदान के लिए डॉ सीताराम आठिया जी द्वारा संपादक दल में शामिल किया गया तथा ऋषि वैदिक विद्यापीठ फतेहाबाद (उतर प्रदेश) की ओर से मानद पीएचडी (विद्यावाचस्पति) की उपाधि से सम्मानित किया गया । उनकी अनेक साझा रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं और कई रचनाएँ प्रकाशाधीन हैं।उनकी रचनाएँ प्रायः विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं व डिजिटल मंचों में प्रकाशित होती रहतीं हैं । वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वेबिनार , सेमिनार व संगोष्ठी आदि में सक्रिय सहभागिता निभातीं रहतीं हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान व प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए हैं।
माधुरी करसाल का व्यक्तित्व साहित्य, शिक्षा तथा महिला सशक्तिकरण के सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। अपने प्रयास, त्याग, समर्पण और रचनात्मक कार्यों से न; केवलअपनी पहचान सुदृढ़ कीं हैं, वरन् स्त्री जाति के साथ समस्त नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहीं हैं।



