
मुंबई। अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा दिनांक 14 जून 2026 को विषय “बरसात” पर आधारित ऑनलाइन कवि सम्मेलन एवं मासिक लेखन सम्मान समारोह का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसकी सुंदर प्रस्तुति मंच की अध्यक्ष एवं संचालिका अलका पाण्डेय ने की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राम राय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तंड उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में संतोष साहू, जनार्दन शर्मा, जनार्दन सिंह, पी. एल. शर्मा तथा शिवपूजन पाण्डेय शामिल रहे। सभी अतिथियों ने अपने प्रेरणादायी वक्तव्यों से साहित्यकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन अलका पाण्डेय ने पूरी शिद्दत और गरिमा के साथ किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में राम राय ने साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कवियों का उत्साह बढ़ाया। मुख्य अतिथि डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तंड ने अपने ओजस्वी वक्तव्य तथा काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सम्मेलन में डॉ. अर्चना दुबे ‘रीत’, डॉ. अंजुल कंसल ‘कनुप्रिया’, नीरजा ठाकुर, ओमप्रकाश पाण्डेय, ओमप्रकाश सिंह,रानी अग्रवाल, कौशिक किशोर, प्रोमिला शुक्ला, अश्विन पाण्डेय, हंसा मेहता, अनीता झा, मीना कुमारी पारासर, पुष्पा गुप्ता, अलका पाण्डेय, मंजू शर्मा, तथा सुरेन्द्र हार्डे सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने बरसात विषय पर विविध भावों से परिपूर्ण रचनाएँ प्रस्तुत कर खूब वाहवाही और तालियाँ बटोरीं।
कार्यक्रम में मासिक लेखन सम्मान भी प्रदान किए गए। साहित्यिक सरोकारों से परिपूर्ण इस आयोजन ने प्रतिभागियों और श्रोताओं के मन पर अमिट छाप छोड़ी।
अंत में अलका पाण्डेय ने सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन साहित्य, सौहार्द और सृजन के सुंदर संदेश के साथ हुआ।
कभी पट करने वाले कवि थे अर्चना दुबे, डा अंजुल कंसल,शोभा रानी तिवारी, अलका पांडे, अश्विन पांडे, नीरज ठाकुर, ओम प्रकाश पांडे, ओमप्रकाश सिंह,हंसा मेहता, कौशल किशोर,
सुरेंद्र हरदे, रवि शंकर कोलते, पुष्पा गुप्ता, मीना कुमारी परिहार,मंजू शर्मा, रानी अग्रवाल प्रोमिला
शुक्ला
आदि
प्रेषक:
अलका पाण्डेय
अध्यक्ष एवं संयोजक
अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच, मुंबई
बरसात का सुंदर आगमन
नभ में काले बादल छाते हैं,
धरती के सूखे अधर मुस्काते हैं।
रिमझिम-रिमझिम बूंदों का संगीत,
मन में भर देता मधुर प्रीत।
पेड़ों की डाली झूम-झूम जाती,
कोयल भी मधुर तराने गाती।
नदियाँ गातीं नव जीवन के गीत,
खेतों में जाग उठती नई उम्मीद।
मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू,
जग में भर देती प्रेम की आरज़ू।
बरखा केवल पानी नहीं लाती,
धरती को हरियाली का हार पहनाती।
आओ हम भी मन के द्वार खोलें,
प्रेम और सद्भाव के दीपक बोलें।
अलका पाण्डेय मुम्बई
ग़ज़ल
बरसात की फुहार ने मौसम सजा दिया,
सूखे हुए चमन को फिर से हरा दिया।
बादल ने आज प्यार का पैगाम भेजकर,
धरती के हर उदास दिल को हँसा दिया।
बूंदों ने छेड़ दी है मोहब्बत की रागिनी,
सावन ने हर तरफ़ नया जादू बिखरा दिया।
मिट्टी की भीनी-भीनी महक कह रही यही,
कुदरत ने फिर से जीने का मतलब बता दिया।
ऐ दोस्त! इस बरस की घटाओं को देखना,
इंसान को इंसान से मिलना सिखा दिया।
डा अश्विन पाण्डेय
वाह वाह, बहुत बढ़िया आभार।वैसे गलका दीदी,कृतघ्न तो हम सब आपके हैं जो हर परिस्थिति में मंच को अग्रसर किये हुए हो,समयानुसार ऑनलाइन कवी सम्मलेन आयोजित कर सम्मान-पत्र ढेकर हमारा गौरव बढाती हो,उत्साहवर्धन करती हो,प्रेरणा देती हो।आपका सच्चे हृदय से अभिनन्दन,आभार।
—– रानी अग्रवाल।मुंबई।
आया सावन झुमके
बरसात झमाझम बरस रही है
धरती की तरह तपा सजनी
आया सावन झुमके।।
सुरेन्द्र हरड़े
नागपुर
सावन
सावन आयो रे ,सावन आयो रे,
उमड़ घुमड़ कर आई बदरिया,
आसमान में छाई बदरिया ,
चम -चम चम -चम बिजुरिया चमके,
तन मन को हर्षाए बदरिया ।
श्रीमती शोभा रानी तिवारी,
बरसात
घनघोर घटाएँ जब छाईं,
धरती प्यारी सी मुस्काई,
बारिश की बूंद गिरकर बोली,
मिट्टी की खुशबू है आयी ।
डॉ. अर्चना दुबे ‘रीत’
मुंबई
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली,
दरवाज़े-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली,
पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
🙏🙏
नीरजा ठाकुर
बरसात आई
काले-काले बादल आए,
नभ में सुंदर छाए।
टिप-टिप करती बारिश आई,
धरती ने मुस्कान दिखाई।
कागज़ की हम नाव चलाएँ,
पानी में उसे तैराएँ।
छप-छप करते खेलें मिलकर,
गीत खुशी के सब गुनगुनाएँ।
Nirja thakur
बदरा
ओ! काले- काले मेघ
जब रिमझिम बरसते हो
शबनम से चमकते हो
मोती से दमकते हो
हर मुख पर आशा का संचार करते हो।
हंसा मेहता इंदौर
9827730677
कविता से चार पंक्तियां—
हरियाली हो जीवन में भी,बनें बाँह लताओं जैसी,
कुमुद कुंज सा जीवन महके सतरंगी आभा हो जैसी।
हरियाली है वही जो हो,भीतर और बाहर दोनों में,
वर्षा जल सा बह जाने दो प्रेम प्रवाह अपने तन मन में।
प्रोमिला शुक्ला 🙏




